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नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते युद्ध के खतरों के बीच भारत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान सरकार की विशेष मंजूरी के बाद भारतीय ध्वज वाले दो बड़े एलपीजी टैंकर, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’, दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित बाहर निकल गए हैं।
मुख्य बिंदु: क्यों अहम है यह खबर?
- सुरक्षित मार्ग: ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ ने सफलतापूर्वक इस युद्धग्रस्त क्षेत्र के करीब से अपना रास्ता पार कर लिया है।
- पीएम मोदी की कूटनीति: माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुई हालिया चर्चा का यह सकारात्मक परिणाम है।
- सैकड़ों नाविकों की सुरक्षा: इस क्षेत्र में अभी भी भारत के कई जहाज मौजूद हैं, जिन पर 700 से अधिक भारतीय नाविक सवार हैं।
कूटनीतिक संवाद का असर
भारत और ईरान के बीच गहराते संबंधों का लाभ यहाँ स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भी संकेत दिया था कि भारत एक मित्र राष्ट्र है और संकट की इस घड़ी में दोनों देशों के साझा हित सर्वोपरि हैं। उन्होंने युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में ईरान को मिली भारतीय मदद का भी आभार जताया।
“भारत हमारा मित्र देश है। मौजूदा हालात में ऊर्जा आपूर्ति और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” – मजीद तख्त-रवांची, ईरान के उप विदेश मंत्री
होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया की ‘तेल की नस’
यह समुद्री मार्ग सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- 20% वैश्विक तेल सप्लाई: दुनिया के कुल तेल और गैस निर्यात का लगभग पांचवा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है।
- ऊर्जा बाजार पर असर: यहाँ जरा सी भी रुकावट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है।
- भारतीय नाविक: मंत्रालय के अनुसार, इस क्षेत्र में भारत के 28 जहाज संचालित हैं, जिनमें लगभग 778 भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
भारत सरकार की पैनी नजर
भारत का पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (Ports & Shipping Ministry) लगातार फारस की खाड़ी में मौजूद हर एक भारतीय जहाज की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल 24 जहाज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और 4 पूर्वी हिस्से में सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
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