भोपाल: देश के विभिन्न हिस्सों में ईसाई समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं के विरोध में आज राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों से भर गया। सर्व ईसाई महासभा के बैनर तले आयोजित इस धरने में देश के कोने-कोने से आए ईसाई समाज के लोगों ने अपनी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर हुंकार भरी।
प्रमुख धर्मगुरुओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
इस विशाल धरने में केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि ईसाई समाज के कैथोलिक धर्मगुरु, विभिन्न चर्चों के पास्टर्स और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सभी ने एक सुर में मसीही समाज पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की।
कट्टरपंथी संगठनों पर प्रतिबंध की मांग
महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैरी पॉल ने मंच से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“भारत के संविधान ने हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया है, लेकिन पिछले कुछ समय से मसीही समाज को निशाना बनाया जा रहा है। सरकार को उन कट्टरपंथी संगठनों पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए जो समाज में वैमनस्य फैला रहे हैं।”
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापन
धरने के समापन पर महासभा के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
ईसाई समाज के खिलाफ हो रही अत्याचार की घटनाओं पर तुरंत रोक लगे।
दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षा की गारंटी दी जाए।
विभिन्न राज्यों से पहुंचे प्रदर्शनकारी
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे कई राज्यों से लोग शामिल होने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अब और चुप्पी नहीं साधे रखेंगे और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।