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शुक्रवार | 20 मार्च, 2026 चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन जगत जननी मां दुर्गा के ‘मां ब्रह्मचारिणी’ स्वरूप की उपासना की जाती है। माँ का यह रूप कठोर तपस्या और ब्रह्मचर्य का प्रतीक है। मान्यता है कि जो भक्त आज के दिन पूरी निष्ठा से माँ की पूजा करते हैं, उन्हें जीवन के कठिन संघर्षों में भी धैर्य (Patience) और अनुशासन (Discipline) बनाए रखने की शक्ति प्राप्त होती है।
✨ आज के विशेष शुभ योग: सर्वार्थ और अमृत सिद्धि
आज का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है क्योंकि आज दो अति दुर्लभ योग बन रहे हैं:
- सर्वार्थ सिद्धि योग: इस योग में किया गया कोई भी कार्य सिद्ध होता है।
- अमृत सिद्धि योग: यह योग कष्टों के निवारण और सफलता के लिए उत्तम माना जाता है।
📋 माँ ब्रह्मचारिणी की पूजन विधि और महत्व
- स्वरूप: माँ के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है।
- आशीर्वाद: माँ अपने भक्तों को विद्या, ज्ञान और एकाग्रता का वरदान देती हैं।
- प्रिय भोग: माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर और फलों का भोग अत्यंत प्रिय है।
🐄 मां को प्रसन्न करने के ‘विशेष उपाय’
यदि आप अपने जीवन में सफलता और मानसिक शांति चाहते हैं, तो आज यह उपाय अवश्य करें:
महा उपाय: पूजन के पश्चात गाय, बैल या सांड को हरा चारा खिलाएं। शास्त्रों के अनुसार, नंदी (बैल) की सेवा करने से मां ब्रह्मचारिणी अति प्रसन्न होती हैं और भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
🧘 ध्यान मंत्र (Meditation Mantra)
आज पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥




