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इंदौर/भोपाल | अंतरराष्ट्रीय युद्ध की तपिश अब मध्य प्रदेश के जायके और रोजगार पर भारी पड़ने लगी है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के कारण देश में कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसका सीधा असर एमपी के होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर दिख रहा है।
हालात इतने गंभीर हैं कि मध्य प्रदेश होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने अब सीधे सरकार के दरवाजे पर दस्तक दी है।
प्रमुख मांगें: 20% नहीं, अब चाहिए 50% कोटा
एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने भोपाल में खाद्य आपूर्ति सचिव रश्मि अरुण शमी से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। संगठन का कहना है कि:
- सप्लाई में वृद्धि: केंद्र के 20% बहाली के आदेश नाकाफी हैं, इसे तुरंत बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए।
- श्रेणीवार कोटा: सभी संस्थानों के लिए एक नियम न हो। होटल के आकार और उसकी खपत (Capacity) के आधार पर गैस का कोटा तय किया जाए।
- PNG पर जोर: पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सप्लाई को भी मांग के अनुसार बढ़ाया जाए ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम हो सके।
जमीनी हकीकत: आदेश के बाद भी राहत गायब
होटल संचालकों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 20% आपूर्ति बहाल करने के निर्देश तो दे दिए हैं, लेकिन राज्य स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस न होने के कारण वितरण व्यवस्था (Distribution) अभी भी ठप है।
“इस उद्योग से लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है। अगर गैस की किल्लत दूर नहीं हुई, तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। हमें उम्मीद है कि सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाएगी।”
— सुमित सूरी, अध्यक्ष, MP होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन
संकट के 3 बड़े कारण और प्रभाव
| कारण | प्रभाव |
| ग्लोबल वॉर (ईरान-इजरायल-अमेरिका) | अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस सप्लाई चेन का टूटना। |
| प्रशासनिक देरी | केंद्र के 20% सप्लाई आदेश का राज्य में प्रभावी क्रियान्वयन न होना। |
| रोजगार पर खतरा | प्रदेश के लाखों वेटर्स, शेफ और सफाई कर्मियों की नौकरी पर तलवार। |




