खिलचीपुर में फिर लौटे ‘जगन्नाथ’: वृंदावन से वापस आईं भगवान की प्रतिमाएं; भक्ति और आंसुओं के साथ हुआ भव्य स्वागत, जानें क्या था पूरा विवाद

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धमकियों से परेशान होकर पुजारी जी के साथ वृंदावन चले गए थे 'प्रभु'। पुलिस के भरोसे और जनता के प्यार के बाद हुई घर वापसी। देर रात तक गूंजे जयकारे।

राजगढ़/खिलचीपुर (drnewsindia.com): राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में पिछले कुछ दिनों से सूने पड़े जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को एक बार फिर आस्था की वापसी हो गई। अपनी सुरक्षा और असामाजिक तत्वों की धमकियों से आहत होकर वृंदावन चले गए पुजारी विष्णु दास सखा, भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा जी की प्रतिमाओं के साथ वापस खिलचीपुर लौट आए हैं। पुलिस की मौजूदगी में जैसे ही प्रतिमाएं मंदिर पहुंचीं, पूरा नगर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयघोष से गूंज उठा।

क्यों खाली हो गया था मंदिर का गर्भगृह?

दरअसल, यह पूरा मामला आस्था और सुरक्षा के बीच उपजे विवाद का था। मंदिर के पुजारी विष्णु दास सखा का आरोप था कि मंदिर परिसर के आसपास कुछ असामाजिक तत्व जमावड़ा लगाकर गांजा पीते थे। जब पुजारी ने इसका विरोध किया और पुलिस में शिकायत की, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। इसी से आहत और भयभीत होकर पुजारी गुरुवार रात भगवान की प्रतिमाएं अपने साथ लेकर वृंदावन चले गए थे। शुक्रवार सुबह जब भक्त मंदिर पहुंचे और गर्भगृह को खाली देखा, तो पूरे नगर में मायूसी छा गई थी।

पुलिस और प्रशासन की पहल रंग लाई

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए खिलचीपुर पुलिस और नगर के प्रबुद्ध जनों की एक टीम वृंदावन पहुंची। वहां पुजारी जी से लंबी चर्चा की गई और उन्हें भविष्य में पूर्ण सुरक्षा का ठोस भरोसा दिलाया गया। प्रशासन के आश्वासन के बाद पुजारी वापस आने को तैयार हुए। सोमवार देर शाम भगवान के आगमन पर भक्तों ने ढोल-मंजीरों के साथ सामूहिक भजन-कीर्तन किया और आरती में जनसैलाब उमड़ पड़ा।

2021 से आस्था का केंद्र है यह मंदिर

आपको बता दें कि श्रीराम पेट्रोल पंप के पास स्थित संत सोहन दास महाराज के आश्रम परिसर में वर्ष 2021 (रामनवमी) को इन प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी। ये प्रतिमाएं विशेष रूप से जगन्नाथ पुरी से लाई गई थीं। पिछले 5 वर्षों से वृंदावन के पुजारी विष्णुदास सखा यहाँ सेवा कर रहे थे। हर साल यहाँ से निकलने वाली भव्य रथ यात्रा पूरे जिले में आकर्षण का केंद्र रहती है।


अब आगे क्या?

स्थानीय प्रशासन ने अब मंदिर परिसर के आसपास गश्त बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई करने का वादा किया है, ताकि दोबारा ऐसी स्थिति निर्मित न हो और पुजारी बिना किसी डर के प्रभु की सेवा कर सकें।

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