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अयोध्या | 27 मार्च 2026: आज चैत्र नवरात्रि की नवमी पर अयोध्या धाम में वह अलौकिक दृश्य देखने को मिला, जिसका करोड़ों सनातनी प्रतीक्षा कर रहे थे। ठीक दोपहर 12:00 बजे, भगवान सूर्य की किरणों ने नव-निर्मित मंदिर में विराजित रामलला के मस्तक पर ‘सूर्य तिलक’ किया। यह अद्भुत घटना ठीक उसी क्षण हुई, जिसे भगवान राम के जन्म का समय माना जाता है।
सूर्य तिलक: विज्ञान और अध्यात्म का संगम
- समय और अवधि: दोपहर 12:00 बजे शुरू हुआ यह तिलक करीब 4 मिनट तक चला।
- दिव्य संयोग: इस बार रामनवमी पर रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का विशेष संयोग बना, जिसने इस आयोजन की धार्मिक महत्ता को कई गुना बढ़ा दिया।
- वैश्विक साक्षी: रामलला के अभिषेक, श्रृंगार और सूर्य तिलक का सीधा प्रसारण (Live Stream) किया गया, जिससे देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालु इस पल के साक्षी बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली टेका मत्था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भव्य समारोह में वर्चुअल माध्यम से शिरकत की।
- वर्चुअल उपस्थिति: पीएम ने सूर्य तिलक के समय हाथ जोड़कर प्रभु श्री राम की पूजा-अर्चना की।
- देशवासियों को संदेश: पीएम ने ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर लिखा— “त्याग, तप और संयम से भरे मर्यादा पुरुषोत्तम के जीवन से हमें हर परिस्थिति का पूरे सामर्थ्य से सामना करने की प्रेरणा मिलती है।” * संकल्प: उन्होंने कामना की कि भगवान राम की कृपा से ‘विकसित और आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की सिद्धि हो।
अयोध्या में उत्सव का माहौल
सूर्य तिलक के साथ ही पूरी अयोध्या नगरी ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंज उठी। मंदिर ट्रस्ट द्वारा रामलला का विशेष पंचामृत अभिषेक और रत्नों से जड़ित श्रृंगार किया गया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों भक्तों ने कनक भवन और राम जन्मभूमि परिसर में दर्शन किए।
विशेष: इस सूर्य तिलक को CBRI रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा दर्पण और लेंस की एक विशेष प्रणाली (Optomechanical System) के जरिए संभव बनाया गया है, जो हर साल रामनवमी पर इसी समय सूर्य की किरणों को रामलला के मस्तक तक पहुँचाएगा।
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