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ईसागढ़ (अशोकनगर) | केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने सख्त तेवरों के लिए जाने जाते हैं, और सोमवार को इसका सीधा अनुभव अशोकनगर के कलेक्टर साकेत मालवीय को करना पड़ा। ईसागढ़ में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक छोटी सी लापरवाही पर सिंधिया का पारा चढ़ गया और उन्होंने सबके सामने कलेक्टर की क्लास लगा दी।
क्या था पूरा मामला?
जनपद पंचायत ईसागढ़ में जनसुनवाई का कार्यक्रम अभी समाप्त ही हुआ था। जनता अपनी समस्याओं के आवेदन देकर जा चुकी थी। जब इन आवेदनों को समेटा जा रहा था, तब कलेक्टर साकेत मालवीय उन्हें बेहद बेतरतीब और लापरवाही से एक थैले में भर रहे थे।
जैसे ही सिंधिया की नजर इस दृश्य पर पड़ी, उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप किया और भरे मंच से कलेक्टर को टोक दिया।
“ये हमारे लिए सोने के समान हैं”
सिंधिया ने आवेदनों के रखरखाव के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कलेक्टर से कहा:
“कलेक्टर साहब, ये महज कागज के टुकड़े नहीं हैं… ये लोगों की उम्मीदें हैं। ये हमारे लिए सोने के समान कीमती हैं। इन्हें इस तरह थैले में मत भरिए।”
प्रशासन को ‘संवेदनशीलता’ का पाठ
सिंधिया यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रशासन को आईना दिखाते हुए कहा कि जनता जब अपनी पीड़ा और संघर्ष की कहानी लेकर आती है, तो उसे पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया:
- भावनाओं का सम्मान: आवेदनों को लापरवाही से रखना लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज करने जैसा है।
- अंतिम उम्मीद: लोग बड़े भरोसे के साथ सरकार के पास आते हैं, उनके आवेदनों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए।
- जिम्मेदारी: फाइलों में दबे कागज किसी के जीवन का संघर्ष हो सकते हैं, इसलिए उन पर संवेदनशीलता से काम हो।
मैदान में सिंधिया का ‘एक्शन’
बता दें कि इन दिनों ज्योतिरादित्य सिंधिया लगातार मैदानी दौरों पर हैं और जनसुनवाई के जरिए सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं। सोमवार की इस घटना ने साफ कर दिया है कि काम में लापरवाही या जनता के प्रति उदासीन रवैया सिंधिया बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। कलेक्टर को लगाई गई इस फटकार की चर्चा अब पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हो रही है।
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