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इंदौर। इस साल भीषण गर्मी के इंतज़ार के बीच बदले हुए मौसम ने आम के शौकीनों की जेब पर भारी असर डाला है। लंबे समय तक रही ठंड और दक्षिण भारत में हुई बेमौसम बारिश के कारण आम की आवक बुरी तरह प्रभावित हुई है। बाज़ार में जहाँ इस समय आम की खुशबू महकनी चाहिए थी, वहीं आवक कम होने से इसके दाम आसमान छू रहे हैं।
आवक में 50% की गिरावट
आम व्यापारियों के अनुसार, दक्षिण भारत (तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) से जहाँ हर साल अप्रैल में प्रतिदिन 20-25 गाड़ियाँ आती थीं, वहीं इस साल यह संख्या घटकर मात्र 12-15 रह गई है। व्यापारियों का कहना है कि:
- बारिश की वजह से फसल खराब हुई है।
- आम का सीज़न करीब एक महीना पिछड़ गया है।
- लॉजिस्टिक और कम उत्पादन के कारण भाव पिछले साल से दोगुने हो गए हैं।
बाज़ार में उपलब्ध 5 प्रमुख किस्में और उनके भाव
अभी बाज़ार में मुख्य रूप से पाँच तरह के आम पहुँच रहे हैं, लेकिन उनकी उपलब्धता रिटेल बाज़ार में कम है:
| आम की किस्म | बाज़ार का हाल और भाव (लगभग) |
|---|---|
| बादामी | रिटेल में ₹200 प्रति किलो तक। |
| हापुस (Alphonso) | होलसेल में ही ₹300-350 प्रति किलो। |
| केसर | आवक कम होने से रिटेल में मिलना मुश्किल। |
| सिंदूरी व तोतापरी | इनकी भी सीमित सप्लाई और ऊँचे दाम। |
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उम्मीद की किरण: अक्षय तृतीया के बाद मिल सकती है राहत
व्यापारी राजकुमार खेमचंद और महेश के अनुसार, अभी सीज़न के दो महीने बाकी हैं। अक्षय तृतीया के बाद आवक बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही मई की शुरुआत में:
- महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से नई आवक शुरू होगी।
- अन्य प्रदेशों से माल आने पर बाज़ार में आम की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों में कमी आ सकती है।
व्यापारी रवि खन्ना का कहना है: “इस बार केवल आम ही नहीं, बल्कि अन्य कई फलों पर भी मौसम का असर दिखा है। हालांकि, मई में बाज़ार गुलज़ार होने की पूरी उम्मीद है।”




