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नई दिल्ली/भोपाल: जहाँ एक ओर पांच राज्यों के चुनावी नतीजों में भाजपा पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मज़बूत दिखी है, वहीं मध्य प्रदेश के लिए एक मायूस करने वाली खबर आई है। एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद और केंद्र में मंत्री एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन को दक्षिण भारत के चुनावी रण में हार का सामना करना पड़ा है।
1. जॉर्ज कुरियन (केरल): कांजीरापल्ली में तीसरे नंबर पर खिसके
केरल में ईसाइयों और भाजपा के बीच सेतु माने जाने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन को पार्टी ने कांजीरापल्ली सीट से उतारा था। उम्मीद थी कि उनका प्रभाव वोटों में बदलेगा, लेकिन वे मुख्य मुकाबले से बाहर होकर तीसरे स्थान पर रहे।
- विजेता: रोनी के. बेबी (कांग्रेस) – 56,646 वोट
- दूसरे नंबर पर: डॉ. एन. जयराज (केरल कांग्रेस-एम) – 50,874 वोट
- जॉर्ज कुरियन (BJP): 26,984 वोट
- हार का अंतर: 29,662 वोट

2. एल. मुरुगन (तमिलनाडु): अविनाशी सीट पर एक्टर विजय की पार्टी से मिली मात
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन अविनाशी (SC) सीट से मैदान में थे। यहाँ मुकाबला काफी दिलचस्प रहा, जहाँ अभिनेता विजय की नई पार्टी TVK ने बड़ा उलटफेर कर दिया। मुरुगन ने AIADMK को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान तो हासिल किया, लेकिन जीत से दूर रह गए।
- विजेता: कमाली एस. (TVK – अभिनेता विजय की पार्टी) – 84,209 वोट
- दूसरे नंबर पर: एल. मुरुगन (BJP) – 68,836 वोट
- तीसरे नंबर पर: डॉ. गोकिलामनी वी. (DMK) – 65,530 वोट
- हार का अंतर: 15,373 वोट

दिग्गजों का परिचय: क्यों अहम थे ये दोनों चेहरे?
| नेता का नाम | पद/जिम्मेदारी | विशेष पहचान |
| एल. मुरुगन | केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री | तमिलनाडु का बड़ा दलित चेहरा, RSS पृष्ठभूमि और मद्रास हाई कोर्ट के वकील रहे हैं। ‘वेल यात्रा’ से पहचान बनाई। |
| जॉर्ज कुरियन | केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री | केरल में 1980 से भाजपा का चेहरा। ईसाइयों के बीच पैठ बनाने के लिए एमपी से राज्यसभा भेजे गए थे। |
विश्लेषण: ‘एमपी कार्ड’ और ‘दक्षिण की लहर’
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इन मंत्रियों के लिए दक्षिण में जमकर चुनाव प्रचार किया था, लेकिन क्षेत्रीय समीकरणों और स्थानीय लहर के सामने यह रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। मुरुगन ने भले ही तमिलनाडु में अपनी व्यक्तिगत साख बचाते हुए दूसरा स्थान पाया, लेकिन केरल में कुरियन के लिए राह काफी मुश्किल साबित हुई ।





