मंत्रियों को सता रहा पद जाने का डर, संगठन में जाने से बच रहे कई बड़े चेहरे
drnewsindia.com/मध्य प्रदेश भाजपा में इन दिनों संगठन और सत्ता के बीच संतुलन को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम जल्द घोषित हो सकती है। ऐसे में प्रदेश के कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के नाम राष्ट्रीय संगठन के लिए चर्चा में हैं। हालांकि, सत्ता के गलियारों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कुछ मंत्री संगठन में जाने से बचना चाहते हैं, क्योंकि ऐसा होने पर उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और कुंवर विजय शाह के नाम राष्ट्रीय टीम की संभावित सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। पार्टी इन नेताओं के अनुभव का उपयोग आगामी उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में करना चाहती है।
हालांकि बताया जा रहा है कि इन नेताओं ने फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार में अपनी जिम्मेदारियां जारी रखने की इच्छा केंद्रीय नेतृत्व के सामने रख दी है। संगठन में जाने का मतलब राज्य सरकार का मंत्री पद छोड़ना हो सकता है, इसलिए कई नेता फिलहाल इस बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।
विजय शाह को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है
आदिम जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह को लेकर पार्टी के भीतर अलग तरह की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि यदि कानूनी या राजनीतिक परिस्थितियों में उनके मंत्री पद पर संकट आता है, तो भाजपा उन्हें राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति अपना सकती है।
डॉ. नरोत्तम मिश्रा की भी बढ़ी सक्रियता
पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम भी राष्ट्रीय टीम के संभावित चेहरों में सामने आ रहा है। पार्टी उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे अहम पद पर जिम्मेदारी दे सकती है। इसके अलावा अगले महीने खाली होने वाली राज्यसभा सीटों में भी उनका नाम संभावित उम्मीदवारों में माना जा रहा है।
वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और पांच बार के सांसद गणेश सिंह के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि ये नेता संगठन से ज्यादा केंद्र सरकार में भूमिका चाहते हैं।
संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति पर नजर
भाजपा के भीतर राष्ट्रीय महासचिव, संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। चर्चा है कि पार्टी कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे नेताओं को इन समितियों में जगह देकर उनका राजनीतिक कद और बढ़ा सकती है। इससे राष्ट्रीय राजनीति में मध्य प्रदेश की पकड़ भी मजबूत होगी।
युवा चेहरों को भी मिल सकता है मौका
भाजपा युवा मोर्चा के दौर में नितिन नवीन के साथ काम कर चुके मध्य प्रदेश के नेताओं में गौरव तिवारी और भक्ति शर्मा के नाम प्रमुख माने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि नई राष्ट्रीय टीम में इन युवा चेहरों को भी स्थान मिल सकता है।
मध्य प्रदेश भाजपा को मिलेगा नया प्रभारी?
संगठन में बदलाव के साथ मध्य प्रदेश भाजपा को नया प्रभारी और सहप्रभारी मिलने की भी संभावना जताई जा रही है। वर्तमान प्रभारी डॉ. महेंद्र यादव आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर फोकस कर सकते हैं। वहीं सहप्रभारी सतीश उपाध्याय दिल्ली की राजनीति और अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। ऐसे में पार्टी जल्द नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंप सकती है।
संगठन और सत्ता के बीच संतुलन की चुनौती
भाजपा के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाए रखने की है। एक तरफ पार्टी अनुभवी नेताओं को राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार भी इन चेहरों पर निर्भर है। ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद मध्य प्रदेश भाजपा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




