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सीहोर (आज की ताजा खबर): सीहोर के इछावर रोड स्थित मां गायत्री हॉस्पिटल में एक प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है। इस घटना को लेकर शुक्रवार को राठौर क्षत्रिय समाज ने भारी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचकर उग्र प्रदर्शन किया। समाज ने अस्पताल की संचालिका डॉ. सुजाता परमार पर लापरवाही और गलत इंजेक्शन देने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। समाजजनों ने इस संबंध में डिप्टी कलेक्टर जमील खान को एक ज्ञापन भी सौंपा।
ऑपरेशन के बाद स्वस्थ थीं मयूरी, इंजेक्शन लगते ही बिगड़ी तबीयत
मिली जानकारी के अनुसार, बग्गी खाना छावनी निवासी अनिल राठौर की पत्नी मयूरी राठौर को प्रसव पीड़ा होने पर 10 मई की रात करीब 10 बजे मां गायत्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। डॉ. सुजाता परमार के परामर्श पर रात 11 बजे मयूरी का सीजर ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद उन्होंने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
अगले दिन यानी 11 मई की सुबह 10 बजे तक मयूरी और उनका नवजात बेटा दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद मयूरी को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कुछ ही देर बाद उनके मुंह से झाग निकलने लगा। गंभीर हालत को देखते हुए डॉ. सुजाता परमार और अस्पताल का स्टाफ मयूरी को तुरंत आईसीयू (ICU) ले गए, लेकिन महज 15 मिनट बाद ही परिजनों को सूचित कर दिया गया कि मयूरी की मौत हो चुकी है।

परिजनों का गंभीर आरोप: “गलत इंजेक्शन से गई जान, डॉक्टर ने बहाना बनाया”
राठौर समाज और मृतिका के परिजनों ने सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मयूरी की जान डॉक्टर द्वारा दिए गए गलत इंजेक्शन की वजह से गई है।
परिजनों ने आक्रोश जताते हुए यह भी बताया कि जब पति अनिल राठौर ने मौत का कारण जानना चाहा, तो डॉक्टर ने कथित तौर पर यह बेतुका बहाना बना दिया कि मौत ‘चाय पीने’ की वजह से हुई है। समाज ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए डॉक्टर को सलाखों के पीछे भेजने की मांग दोहराई है।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हुए समाजजन
कलेक्ट्रेट में हुए इस विरोध प्रदर्शन में राठौर समाज के अध्यक्ष रामचंद्र राठौर, समाजसेवी सतीश राठौर, जितेंद्र राठौर, विवेक राठौर, अखिलेश पहलवान, सन्नी सरदार सहित बड़ी संख्या में मृतिका के परिजन और राठौर क्षत्रिय समाज के लोग मौजूद रहे। समाज का कहना है कि जब तक जिम्मेदार डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई और अस्पताल को बंद नहीं किया जाता, उनका न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।





