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बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट के हालिया दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ईंधन, ऊर्जा और संसाधनों की बचत के लिए अपने कामकाज के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के निर्देश पर हाईकोर्ट रजिस्ट्री ने एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत समर वेकेशन (मई-जून की छुट्टियों) के दौरान अदालती सुनवाई पूरी तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।
भीषण गर्मी में वकीलों और पक्षकारों को बड़ी राहत
इस नए आदेश के बाद झुलसाने वाली गर्मी में वकीलों और पक्षकारों को शारीरिक रूप से कोर्ट रूम के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, कोर्ट ने इस व्यवस्था को लचीला रखा है:
- जो वकील किसी तकनीकी कारणवश वर्चुअली (ऑनलाइन) नहीं जुड़ पाएंगे, उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने की छूट रहेगी।
- यदि किसी मामले में बेहद जरूरी हुआ, तो अदालत खुद भी फिजिकल सुनवाई के निर्देश दे सकेगी।
कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ और 50% रोटेशन फॉर्मूला
अदालती कामकाज प्रभावित न हो और संसाधनों की भी बचत हो, इसके लिए कर्मचारियों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है:
- हाईकोर्ट और जिला अदालतों के स्टाफ को सप्ताह में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की सुविधा दी जा सकती है।
- कार्यालयों में 50 प्रतिशत रोटेशन व्यवस्था लागू रहेगी, ताकि प्रशासनिक और न्यायिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।
- घर से काम करने वाले कर्मचारियों को वर्किंग आवर्स के दौरान फोन, ईमेल और अन्य सरकारी संचार माध्यमों पर हर समय उपलब्ध रहना अनिवार्य होगा।
ईंधन बचाने के लिए जज और अधिकारी करेंगे ‘कार पूलिंग’
पर्यावरण संरक्षण और सरकारी फ्यूल की बचत के लिए हाईकोर्ट ने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। इसके तहत:
- राज्य के न्यायिक अधिकारियों, रजिस्ट्री अफसरों और मंत्रालयीन स्टाफ के लिए व्हीकल पूलिंग (साझा वाहन व्यवस्था) लागू करने का प्रस्ताव है।
- हाईकोर्ट के माननीय जजों से भी आग्रह किया गया है कि वे अदालत आते-जाते समय आपस में कार-पूलिंग का उपयोग करें।
तकनीकी तैयारियों को दुरुस्त करने के निर्देश
चीफ जस्टिस के आदेश के बाद हाईकोर्ट रजिस्ट्री के तकनीकी विंग को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑनलाइन माध्यमों को बिना किसी बाधा के संचालित करने के लिए अलर्ट कर दिया गया है।
हाईकोर्ट प्रशासन का संदेश: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तकनीक, आपसी समन्वय और संस्थागत जिम्मेदारी के जरिए आम जनता के लिए न्याय को सुलभ और सुगम बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह कदम देशहित में संसाधनों के बेहतर उपयोग और पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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