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अशोकनगर / प्रदेश में जारी भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। बिजली की आंख-मिचौली से परेशान होकर मंगलवार को भारी संख्या में ग्रामीणों ने कोलवा रोड स्थित पावर हाउस का घेराव किया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों की इस समस्या को लेकर स्थानीय विधायक हरी बाबू राय भी उनके समर्थन में मौके पर पहुंचे और बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
📌 मुख्य बातें (Key Highlights):
- पावर हाउस का घेराव: भीषण गर्मी से परेशान होकर कई गांवों के लोग कोलवा रोड पावर हाउस पर एकत्रित हुए।
- विधायक का समर्थन: स्थानीय विधायक हरी बाबू राय ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया।
- बच्चों की बिगड़ती तबीयत: रात की कटौती और उमस के कारण बच्चे बीमार हो रहे हैं, अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
- लंबे समय का इंतजार: गांवों में जले हुए ट्रांसफार्मर महीनों तक नहीं बदले जा रहे हैं।
रात की अघोषित कटौती से रातें बनीं मुसीबत
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि दिन तो जैसे-जैसे कट जाता है, लेकिन असली मुसीबत रात के समय खड़ी होती है। जब लोग गहरी नींद में होते हैं, तब अचानक बिना किसी सूचना के बिजली काट दी जाती है। इस भीषण गर्मी में बिना पंखे-कूलर के रहना असंभव हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। उमस और गर्मी की वजह से मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ रही है।

विभाग का बहाना— ‘भोपाल से लोड सेटिंग का काम जारी है’
ग्रामीणों के सुर में सुर मिलाते हुए विधायक हरी बाबू राय ने कहा कि पूरे क्षेत्र में रात के समय लगातार अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। जब इस संबंध में बिजली विभाग के स्थानीय अधिकारियों से बात की जाती है, तो वे सीधे तौर पर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। विभाग का कहना होता है कि “भोपाल से लोड सेट करने का काम चल रहा है।”
विधायक ने तीखे लहजे में कहा कि इस ‘लोड सेटिंग’ के खेल में आम जनता पिस रही है। बिजली न मिलने से लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों में बीमारियां बढ़ रही हैं और अस्पतालों में मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं।

विधायक ने लगाए गंभीर आरोप: महीनों तक नहीं बदले जाते जले ट्रांसफार्मर
पावर हाउस पर प्रदर्शन के दौरान विधायक हरी बाबू राय ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप भी लगाए:
- ट्रांसफार्मर की समस्या: गांवों में यदि कोई ट्रांसफार्मर जल जाता है, तो विभाग उसे समय पर नहीं बदलता। ग्रामीणों को इसके लिए महीनों तक अंधेरे में रहकर इंतजार करना पड़ता है।
- बिजली बिलों की अनियमितता: उपभोक्ताओं को समय पर बिजली के बिल नहीं दिए जाते। जब कई महीनों का बिल एक साथ भारी-भरकम राशि के रूप में आता है, तो गरीब ग्रामीणों पर अचानक आर्थिक बोझ बढ़ जाता है और उन्हें एकमुश्त भुगतान करने में भारी परेशानी होती है।
भोपाल के उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा पत्र
विधायक राय ने स्पष्ट किया कि बिजली कटौती के नाम पर बार-बार भोपाल का हवाला देकर स्थानीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उन्होंने कहा कि वह इस गंभीर समस्या को लेकर सीधे भोपाल के संबंधित उच्च अधिकारियों और बिजली मंत्रालय को पत्र लिखेंगे और मांग करेंगे कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की अघोषित बिजली कटौती को तुरंत बंद किया जाए।





