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भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश के विद्यार्थियों के हित में कई बड़े और ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान ड्रापआउट (पढ़ाई छोड़ चुके) विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिए ‘शिक्षा घर योजना’ को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही अब प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में सम्राट वीर विक्रमादित्य की जीवनी को भी शामिल किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग इसी शैक्षणिक सत्र से इन महत्वपूर्ण बदलावों को लागू करने की तैयारी में जुट गया है।
🏠 क्या है ‘शिक्षा घर योजना’ और किसे मिलेगा लाभ?
यह योजना मध्यप्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा बोर्ड (MPSOS) द्वारा पूरे प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में संचालित की जाएगी।
- कक्षा 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वालों को मौका: योजना का सीधा लाभ उन किशोर-किशोरियों और युवक-युवतियों को मिलेगा, जिन्होंने कक्षा 8 या उसके बाद की कक्षाओं में अनुत्तीर्ण (फेल) होने के चलते अपनी पढ़ाई हमेशा के लिए छोड़ दी थी।
- मिलेगा परीक्षा उत्तीर्ण करने का अवसर: इस योजना के जरिए ऐसे युवाओं को फिर से हाईस्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षा उत्तीर्ण करने का सुनहरा अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।
- ड्रॉपआउट रेट कम करने पर फोकस: सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में स्कूल छोड़ चुके बच्चों की संख्या में भारी कमी लाना है।

🤝 इतिहास में पहली बार: स्कूल शिक्षा और महिला बाल विकास मिलकर करेंगे काम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए हैं कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए शुरुआत से ही एक बेहतर माहौल तैयार किया जाए। इसके लिए मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार स्कूल शिक्षा विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लिए एक साथ मिलकर जमीनी स्तर पर काम करेंगे।
💻 कक्षा 8वीं से 12वीं में जुड़ेगा AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)
बदलते दौर और आधुनिक तकनीक को देखते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को कुछ नए और कड़े निर्देश भी दिए हैं:
- AI और व्यावसायिक प्रशिक्षण: शासकीय स्कूलों में कक्षा 8वीं से 12वीं के छात्रों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के कौशल को जोड़ने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही स्कूलों में कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे रोजगारपरक व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी पढ़ाए जाएंगे।
- 12वीं के बाद छात्रों की ट्रैकिंग: सरकारी स्कूलों से पास आउट होने वाले छात्र 12वीं के बाद उच्च शिक्षा, रोजगार, कृषि या अपने पैतृक व्यवसाय में से किस क्षेत्र में जा रहे हैं, इसकी ट्रैकिंग कर सरकार युवाओं का एक बड़ा डेटाबेस तैयार करेगी।
- अतिथि शिक्षकों की भर्ती: सत्र प्रारंभ होने से पहले यानी 1 जुलाई से पहले अतिथि शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
🏫 जर्जर स्कूल भवनों की होगी तत्काल मरम्मत, बनेंगे बाउंड्री वॉल
विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी आंशिक रूप से जर्जर (जीर्ण-शीर्ण) स्कूल भवनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और सभी स्कूलों में बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जाए। इसके अलावा, जिन हाईस्कूलों के पास हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं हैं, उन्हें अपग्रेड (प्रोन्नत) करने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- शत-प्रतिशत रिजल्ट वाले स्कूलों का सम्मान: प्रदेश की ऐसी 26 शासकीय शालाएं हैं जहां इस बार शत-प्रतिशत (100%) परीक्षा परिणाम आया है। मुख्यमंत्री ने इन शालाओं के साथ-साथ 90% से अधिक रिजल्ट देने वाले स्कूलों को भी सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की घोषणा की है।
- 1 जुलाई से शिक्षक वंदना कार्यक्रम: स्कूलों में 1 जुलाई से गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) तक अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘शिक्षक वंदना कार्यक्रम’ आयोजित किया जाएगा। साथ ही पुराने छात्रों को स्कूल से जोड़ने के लिए ‘पूर्व छात्र सम्मेलन’ भी आयोजित होंगे।
📈 सरकारी स्कूलों में बढ़ा रुझान: नामांकन दर में 32% की भारी वृद्धि
बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव ने बताया कि सरकार के प्रयासों से साल 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में सरकारी स्कूलों के प्रति बच्चों और पालकों का रुझान तेजी से बढ़ा है:
- कक्षा-1 में नामांकन: पिछले वर्ष के मुकाबले कक्षा पहली में इस साल रिकॉर्ड 32.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- कक्षा 9वीं से 12वीं में नामांकन: हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी कक्षाओं में 4.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले वर्षों में सबसे अधिक है।
- प्रवेशोत्सव का असर: 1 अप्रैल को आयोजित प्रवेशोत्सव के चलते अप्रैल महीने में ही 92 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों का शाला में प्रवेश सुनिश्चित करा लिया गया था।





