NCERT ने जारी की 8वीं क्लास की सोशल साइंस की संशोधित किताब: न्यायपालिका वाला विवादित चैप्टर बदला, करप्शन-लंबित मुकदमों के मुद्दे हटे; हुसैनारा खातून और विशाखा गाइडलाइंस शामिल

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National Education Desk (07 July 2026): नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8वीं के छात्रों के लिए सोशल साइंस (भाग-2) की संशोधित पाठ्यपुस्तक आधिकारिक तौर पर जारी कर दी है। इस नई किताब का नाम ‘Exploring Society: India and Beyond’ रखा गया है। यह किताब इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को एक एकीकृत (Integrated) रूप में छात्रों के सामने प्रस्तुत करती है।

गौततलब है कि इस किताब को पहले 23 फरवरी 2026 को जारी किया गया था, लेकिन न्यायपालिका (Judiciary) से जुड़े कुछ विवादित कंटेंट के कारण महज़ एक दिन बाद यानी 24 फरवरी को इसकी ऑफलाइन बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद पूरे चैप्टर को दोबारा लिखकर नया एडिशन पब्लिश किया गया है।

📌 NCERT की नई किताब की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 📘 किताब का नाम: Exploring Society: India and Beyond (कक्षा 8वीं, भाग-2)।
  • ⚖️ सुप्रीम कोर्ट का आदेश: विवादित कंटेंट पर NCERT द्वारा अदालत से माफी मांगने के बाद चैप्टर को री-राइट करने का आदेश दिया गया था।
  • क्या हटाया गया? न्यायपालिका की चुनौतियां, अदालतों में पेंडिंग केस और भ्रष्टाचार (Corruption) जैसे विवादित टॉपिक पूरी तरह हटाए गए।
  • 🎯 क्या नया जुड़ा? जनहित याचिका (PIL), संविधान की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, ट्रिब्यूनल और अल्टरनेटिव डिस्प्यूट रेजोल्यूशन (ADR) को शामिल किया गया।
  • 👥 टीम में बदलाव: पुरानी किताब तैयार करने वाले 51 एक्सपर्ट्स में से 3 बड़े नाम (मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार) हटा दिए गए हैं, अब टीम में 48 सदस्य हैं।

🔍 चैप्टर से करप्शन और पेंडिंग केस के मुद्दे साफ, अब पढ़ाए जाएंगे ये नए नियम

संशोधित किताब में “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक वाले चैप्टर का पूरा कलेवर बदल दिया गया है। पहले जहां भारतीय न्यायपालिका की कमियों और भ्रष्टाचार को रेखांकित किया गया था, वहीं अब सकारात्मक और विनियामक पहलुओं पर जोर दिया गया है:

अब ये पढ़ेंगे छात्र: नए एडिशन में अब छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट किस तरह संविधान की रक्षा करता है। इसके अलावा आम लोगों की न्याय तक पहुंच को सुगम बनाने वाली प्रणालियों जैसे जनहित याचिका (PIL) और अदालतों से बाहर आपसी समझौते से विवाद सुलझाने वाली वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution) व्यवस्थाओं को विस्तार से समझाया गया है।

⚖️ ऐतिहासिक अदालती फैसलों और PIL के उदाहरणों से सजी किताब

8वीं क्लास के छात्रों को भारतीय कानूनी इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और मील का पत्थर साबित हुए फैसलों को उदाहरण के रूप में समझाया गया है:

  1. अनुच्छेद 32 और 226: पहली बार जनहित याचिका (Public Interest Litigation) को सरल भाषा में समझाते हुए बताया गया है कि कैसे इन अनुच्छेदों के तहत आम जनता के अधिकारों के लिए सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।
  2. हुसैनारा खातून केस: इस ऐतिहासिक केस का जिक्र शामिल किया गया है, जिसने देश की जेलों में सालों से बंद विचाराधीन कैदियों (Under-trial Prisoners) की रिहाई का रास्ता साफ किया था।
  3. एम.सी. मेहता केस: पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण के खिलाफ लड़ी गई कानूनी लड़ाई को इसमें जगह मिली है।
  4. विशाखा निर्णय (Vishakha Guidelines): कार्यस्थल (Workplace) पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा और कड़े दिशा-निर्देश तय करने वाले ऐतिहासिक विशाखा जजमेंट की पूरी जानकारी जोड़ी गई है।

🛠️ विवाद के बाद कड़े हुए नियम: जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में बनी कमेटी

इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए कई प्रशासनिक फेरबदल किए हैं:

  • निगरानी समिति का गठन: पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्त‍िस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और प्रकाश सिंह (कुलपति, एचएनबी गढ़वाल यूनिवर्सिटी) को शामिल किया गया है।
  • समीक्षा में नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी शामिल: अब न्यायपालिका से जुड़े किसी भी स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा प्रक्रिया में नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी अनिवार्य रूप से जोड़ा गया है।
  • NCERT का पुनर्गठन: काउंसिल ने अपनी कोर्स तैयार करने वाली आंतरिक समितियों का पुनर्गठन करते हुए किताबों के अप्रूवल, पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन की पूरी प्रक्रिया को पहले से कहीं ज्यादा सख्त और पारदर्शी बना दिया है।

बता दें कि यह पूरा बदलाव नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत किया जा रहा है, जिसके तहत कक्षा 1 से 8वीं तक की सभी नई किताबें पहले ही साल 2025 में पब्लिश की जा चुकी हैं और अब उनमें समय-समय पर संशोधन किए जा रहे हैं।

स्रोत: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) प्रेस रिलीज एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।

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