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आष्टा। रीवा में दिगंबर जैन आर्यिका संघ के पदविहार के दौरान हुए दर्दनाक हादसे को लेकर पूरे देश सहित आष्टा में भी जैन समाज का आक्रोश और गहरा दुख फूट पड़ा है। दिवंगत आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी की असमय समाधि के विरोध में आष्टा में सकल जैन समाज द्वारा एक विशाल और अनुशासित मौन रैली निकाली गई। इस रैली में न केवल जैन समाज, बल्कि अन्य समाजों के नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में शामिल होकर सामाजिक एकता और संत समाज के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की।
रैली के समापन पर महामहिम राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम आष्टा एसडीएम (SDM) को एक विशेष ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें देशभर में विहार कर रहे जैन संत-साध्वियों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की गई।
‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ और ‘सुरक्षा प्रकोष्ठ’ बनाने की उठी मांग
सौंपे गए ज्ञापन में जैन समाज ने सरकार से बेहद महत्वपूर्ण और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव लाने वाली निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच: रीवा की घटना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि सच सामने आ सके।
- दोषियों पर कठोर कार्रवाई: संत समाज पर तेज रफ्तार वाहन चढ़ाने वाले दोषियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में सख्त कार्रवाई की जाए।
- संत सुरक्षा प्रोटोकॉल: देशभर के राजमार्गों और संवेदनशील क्षेत्रों में पदविहार कर रहे संतों के लिए एक विशेष ‘संत सुरक्षा प्रोटोकॉल’ (Saint Security Protocol) तुरंत लागू किया जाए।
- सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ: प्रशासनिक स्तर पर एक विशेष “संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ” का गठन हो, जो पुलिस और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से संतों के विहार रूट पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।

“संत समाज भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर”
ज्ञापन सौंपने से पूर्व श्रीसंघ अध्यक्ष पवन सुराणा ने रीवा की हृदयविदारक घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए दोनों दिवंगत आर्यिका माताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “जंगल मार्ग से शांतिपूर्ण पदविहार कर रहे संतों पर जानबूझकर तेज गति से वाहन चढ़ा देना बेहद गंभीर और निंदनीय कृत्य है। इसे केवल एक दुर्घटना मानकर टाला नहीं जा सकता।”
वहीं, समाज की प्रबुद्ध महिलाओं शकुंतला छाजेड़, श्रद्धा गंगवाल, संगीता सेठी और डॉ. मीना सिंगी सहित अनेक मातृशक्तियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि संत समाज हमारी भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिनकी रक्षा करना सरकार और समाज दोनों का परम कर्तव्य है।

क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि बीते दिनों रीवा जिले में जंगल मार्ग से पदविहार कर रहे दिगंबर जैन आर्यिका संघ को एक तेज रफ्तार कार ने अपनी चपेट में ले लिया था। इस भीषण हादसे में दो पूज्य आर्यिका माताजी का असमय निधन हो गया था, जबकि कई अन्य आर्यिकाएं और उनके साथ चल रहे श्रावक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद से ही पूरे देश के जैन समाज में गहरा आक्रोश है और जगह-जगह मौन रैलियां निकालकर विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
आष्टा में आयोजित हुई इस मौन रैली के दौरान पूरा वातावरण अत्यंत शांत, अनुशासित और भावनात्मक बना रहा, जिसने प्रशासन को संतों की सुरक्षा के प्रति सोचने पर मजबूर कर दिया है।





