बिजनेस अपडेट: भारत-कनाडा निवेश गोलमेज बैठक में पीयूष गोयल का बड़ा एलान, वैश्विक निवेशकों को दिया भारत आने का न्योता

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बिजनेस डेस्क : भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को नई रफ्तार देने के लिए एक बड़ी रणनीतिक बैठक का आयोजन किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने कनाडाई समकक्ष (Counterpart) मनिंदर सिद्धू के साथ मिलकर ‘कनाडा-भारत निवेश गोलमेज’ (Canada-India Investment Roundtable) बैठक की सह-अध्यक्षता की।

इस हाई-लेवल बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने पर बेहद गंभीर और सकारात्मक चर्चा हुई।

कनाडाई पेंशन फंड और बड़े निवेशकों के साथ महामंथन

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस बैठक की महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि इस गोलमेज सम्मेलन में कनाडा के प्रमुख पेंशन फंड, सॉवरेन और संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) के साथ-साथ ‘कनाडा-भारत व्यापार परिषद’ के सदस्यों और कई अन्य प्रमुख हितधारकों (Stakeholders) ने हिस्सा लिया।

श्री गोयल ने निवेशकों के सामने भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था का पक्ष रखते हुए कहा कि:

  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: भारत सरकार का बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास पर विशेष जोर है।
  • वित्तीय सुधार: वित्तीय क्षेत्र में लगातार हो रहे सुधारों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: भारत में व्यापार करने को आसान (Ease of Doing Business) बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों के कारण वैश्विक निवेशकों के लिए देश में ‘अभूतपूर्व और शानदार अवसर’ पैदा हो रहे हैं।

इन 6 बड़े सेक्टर्स में निवेश के लिए दिया आमंत्रण

केंद्रीय मंत्री ने कनाडा के दिग्गज निवेशकों और वित्तीय दिग्गजों को भारत के विकास की कहानी का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने मुख्य रूप से इन उभरते हुए क्षेत्रों में साझेदारी करने पर जोर दिया:

  1. स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy): हरित और सस्टेनेबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स।
  2. प्रौद्योगिकी (Technology): टेक सेक्टर में नए नवाचार।
  3. डिजिटल बुनियादी ढांचा (Digital Infrastructure): देश का तेजी से फैलता डिजिटल नेटवर्क।
  4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): भविष्य की तकनीक एआई पर काम।
  5. विनिर्माण (Manufacturing): ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा।
  6. आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण (Supply Chain Diversification): वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाना।

इसके साथ ही, दोनों नेताओं ने दोनों देशों के सतत विकास (Sustainable Development) और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय बाजारों में आपसी सहयोग को और अधिक गहरा करने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की।

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