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मेक्सिको सिटी:फीफा वर्ल्ड कप 2026 का शंखनाद हो चुका है और ओपनिंग मैच में मेक्सिको ने दक्षिण अफ्रीका को 2-0 से हराकर टूर्नामेंट का धमाकेदार आगाज किया है। मेक्सिको सिटी का ऐतिहासिक ‘ज़ोकालो स्क्वायर’ (Zocalo Square) और ‘एंजेल ऑफ इंडिपेंडेंस’ स्मारक हजारों प्रशंसकों की भीड़, गगनभेदी नारों और जीत के जश्न से सराबोर है। लेकिन इस चमकते हुए फुटबॉल उत्सव का एक दूसरा पहलू भी है। जहां एक तरफ देश जीत की खुमारी में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ देश के भविष्य को गढ़ने वाले शिक्षक सड़कों पर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
देश के लिए योगदान देने में कभी पीछे न रहने वाले इन शिक्षकों का यह संघर्ष फुटबॉल के इस महाकुंभ के समानांतर चल रहा है, जिसने वैश्विक मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

एक तरफ: मैदान पर जीत और फैंस का दीवानापन
गुरुवार को एज़्टेका स्टेडियम (Azteca Stadium) में जैसे ही रेफरी ने मैच खत्म होने की सीटी बजाई, पूरा मेक्सिको जश्न में डूब गया। सरकार द्वारा जगह-जगह लगाई गई जाइंट स्क्रीन्स के सामने फैंस नाचते-गाते नजर आए। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2-0 की इस शानदार जीत ने देश में त्योहार जैसा माहौल बना दिया है। लाखों विदेशी फैंस और स्थानीय लोग इस फुटबॉल एक्स्ट्रावेगेंजा का लुत्फ उठा रहे हैं।
दूसरी तरफ: हक के लिए सड़कों पर उतरे ‘राष्ट्र निर्माता’
लेकिन इस जश्न से कुछ ही दूरी पर मेक्सिको की एक अलग तस्वीर दिखाई दी। देश की शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले CNTE शिक्षक संघ के हजारों शिक्षक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं।
ये शिक्षक वर्ल्ड कप फैन ज़ोन (ज़ोकालो स्क्वायर) के पास ही अपना डेरा जमाए हुए हैं। उनका यह आंदोलन केवल अपनी आवाज उठाने के लिए नहीं है, बल्कि उस योगदान के सम्मान के लिए है जो वे दशकों से देश को देते आ रहे हैं।

फुटबॉल के शोर में नहीं दबी मांगें
ओपनिंग मैच से कुछ ही घंटे पहले, सुबह करीब 7:00 बजे प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने दक्षिणी मेक्सिको सिटी के मुख्य रास्तों और एज़्टेका स्टेडियम को जोड़ने वाले रास्तों को ब्लॉक कर दिया। पुलिस के कड़े पहरे और कंक्रीट के बैरिकेड्स के बीच शिक्षकों ने शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मुखर तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया।
क्या हैं शिक्षकों की मांगें?
शिक्षक अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनके मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:
- पेंशन सुधार (2007) को रद्द करना: साल 2007 में लागू किए गए कानून को वापस लेने की मांग, जिसने पारंपरिक राज्य-समर्थित पेंशन व्यवस्था को वित्तीय बाजारों से जुड़े व्यक्तिगत योगदान योजना में बदल दिया था।
- वेतन में बढ़ोतरी: शिक्षकों का कहना है कि देश के विकास में उनका योगदान कभी कम नहीं रहा, इसलिए उन्हें उचित वेतन मिलना चाहिए।
- न्याय की गुहार: इस प्रदर्शन में उन परिवारों को भी शामिल किया गया है जिनके अपने ‘लापता’ (Disappeared) हो चुके हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने वे अपनी आवाज उठा सकें।
सरकार का रुख: दमन नहीं, बातचीत का रास्ता

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम (Claudia Sheinbaum) ने प्रदर्शनों को वर्ल्ड कप के दौरान एक “उकसावे” की कार्रवाई बताया है, हालांकि उन्होंने साफ किया है कि सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग या दमन की नीति नहीं अपनाएगी। सरकार का कहना है कि मैच और सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित है, लेकिन शिक्षकों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने के प्रयास जारी हैं।
मेक्सिको सिटी की सड़कें इस समय दो विपरीत भावनाओं की गवाह बनी हुई हैं—एक तरफ फुटबॉल की चमचमाती दुनिया और जीत का उन्माद है, तो दूसरी तरफ अपने भविष्य और सम्मान के लिए संघर्ष करते शिक्षकों की कतारें। यह देखना दिलचस्प होगा कि वर्ल्ड कप के इस सफर के साथ-साथ मेक्सिको सरकार अपने इन नाराज ‘राष्ट्र निर्माताओं’ को कैसे शांत करती है।





