drnewsindia.com
सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल कुबेरेश्वरधाम में मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्मोत्सव बेहद श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से हजारों की संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। पूरे दिन कुबेरेश्वरधाम परिसर भक्ति के रंग में डूबा रहा और श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल व अपने गुरुदेव का आशीर्वाद लिया।
“सच्चे मन से की गई शिव भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती” — पंडित प्रदीप मिश्रा
जन्मोत्सव के मौके पर आयोजित विशेष प्रवचन में पंडित प्रदीप मिश्रा ने उपस्थित जनसैलाब को शिव महिमा का रसपान कराया। उन्होंने भक्तों को समझाते हुए कहा:
“भगवान शिव को भोलेनाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की छोटी-सी श्रद्धा और एक लोटे जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। सच्चे मन से की गई शिव भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती। महादेव अपने शरणागत भक्तों के सारे दुख, संकट और बाधाओं को हरकर उन्हें सुख, शांति और समृद्धि का आशीष देते हैं।”
गुरुदेव का भक्तों को संदेश:
- सकारात्मक जीवन: जो व्यक्ति अटूट विश्वास के साथ शिव नाम का जाप करता है, उसका जीवन सकारात्मकता से भर जाता है।
- दैनिक नियम: सभी श्रद्धालु रोज नियम से भगवान शिव का स्मरण करें और शिवलिंग पर जल अर्पित कर मानव सेवा को जीवन का हिस्सा बनाएं।

विठलेश सेवा समिति का रिकॉर्ड महाप्रसाद: क्विंटल के हिसाब से बंटी प्रसादी
इस भव्य जन्मोत्सव को सेवा के रूप में मनाते हुए कुबेरेश्वरधाम की भोजनशाला में विठलेश सेवा समिति द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। पंडित विनय मिश्रा और पंडित समीर शुक्ला के मार्गदर्शन में सेवादारों ने हजारों भक्तों के लिए रिकॉर्ड मात्रा में प्रसादी वितरित की:
| प्रसादी का प्रकार | कुल मात्रा (क्विंटल में) |
| खिचड़ी महाप्रसाद | 10 क्विंटल से अधिक |
| मावे की शाही बर्फी | 08 क्विंटल से अधिक |
| रसीले गुलाब जामुन | 05 क्विंटल से अधिक |
| ताजा आमरस | 05 क्विंटल से अधिक |
| अन्य भोजन | नमकीन, गरमा-शर्म रोटी और सब्जी |

‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गुंजायमान हुआ आकाश
पंडित प्रदीप मिश्रा के भजनों और कथा के दौरान पूरा पंडाल तालियों और जयकारों की गूंज से सराबोर हो उठा। हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का जयघोष किया, जिससे पूरा कुबेरेश्वरधाम परिसर गुंजायमान हो गया। कथा के मुख्य विश्राम के बाद भक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान शिव का विशेष अभिषेक और पूजन-अर्चन किया तथा देश व अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।




