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बैतूल। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू अपने पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के अगले चरण में गुरुवार को बैतूल पहुंचीं। उन्होंने बैतूल के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ब्रह्मकुमारीज संस्थान द्वारा आयोजित “आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण” महासम्मेलन का भव्य शुभारंभ किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि एक विकसित भारत के निर्माण की यात्रा केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसकी नींव अध्यात्म, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण पर टिकी होनी चाहिए।
🎶 राष्ट्रगीत और दीप प्रज्ज्वलन के साथ भव्य शुरुआत
स्टेडियम में आयोजित इस विशाल कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की गूंज के साथ हुई। इसके बाद महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू ने दीप प्रज्ज्वलित कर महासम्मेलन का विधिवत शुभारंभ किया।
- कलाकारों की प्रस्तुति: कार्यक्रम की शुरुआत में स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा जनजातीय संस्कृति को प्रदर्शित करती मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- सम्मान: ब्रह्मकुमारीज संस्थान की ओर से राष्ट्रपति को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) भेंट कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया।

🌱 “जनजातीय समाज का प्रकृति प्रेम पूरे देश के लिए अनुकरणीय”
आदिवासी समुदाय के जीवन मूल्यों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस समाज ने आधुनिकता की चकाचौंध के बीच भी अपनी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखा है।
- मानवीय मूल्य: जनजातीय समाज के जीवन में संवेदना, आपसी सहयोग, ईमानदारी और अटूट मानवीय मूल्य शामिल हैं, जो देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: आदिवासी समुदाय का जल, जंगल और जमीन के प्रति जो जुड़ाव है, वह आज के पर्यावरण संकट के दौर में सबसे बड़ा सबक है। राष्ट्रपति ने आह्वान किया कि पर्यावरण संरक्षण और अधिक से अधिक वृक्षारोपण को अब एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन बनाना होगा।
🇮🇳 “भारत केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है”
अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में राष्ट्रपति ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने अटल जी के प्रसिद्ध कथन को दोहराते हुए कहा:
“भारत केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक जीता-जागता राष्ट्रपुरुष है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश का प्रत्येक हिस्सा भारत माता की आत्मा का अभिन्न अंग है।”
उन्होंने अटूट विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए देश के सभी समुदायों और विशेष रूप से जनजातीय समाज की समान भागीदारी और सशक्तिकरण बेहद जरूरी है।

🤝 मंच पर मौजूद रहे राज्यपाल सहित कई विशिष्ट अतिथि
इस ऐतिहासिक महासम्मेलन की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने की। कार्यक्रम में प्रशासनिक और आध्यात्मिक जगत की कई बड़ी हस्तियां शामिल हुईं:
- केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके
- प्रदेश के राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल
- ब्रह्मकुमारीज संस्थान के ओडिशा प्रभारी डॉ. नथमल
- माउंट आबू (संस्थान मुख्यालय) से आईं आदरणीय लीना बहन और शैलजा बहन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनीधि और श्रद्धालु।

📌 बैतूल महासम्मेलन: एक नजर में (Quick Takeaways)
| मुख्य बिंदु | कार्यक्रम का विवरण |
| मुख्य अतिथि | श्रीमती द्रौपदी मुर्मू (माननीय राष्ट्रपति, भारत) |
| आयोजक संस्था | प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय |
| महासम्मेलन का विषय | आध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तिकरण |
| आयोजन स्थल | लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम, बैतूल (म.प्र.) |
| मुख्य संदेश | आध्यात्मिक शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प |




