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श्योपुर/भोपाल। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी और प्रमुख पहल ‘प्रोजेक्ट चीता’ (चीता पुनर्वास परियोजना) की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। इस ऐतिहासिक परियोजना का मुख्य उद्देश्य भारत की धरती से दशकों पहले विलुप्त हो चुकी वन्य जीव प्रजाति ‘चीता’ को देश के जंगलों में फिर से पुनर्स्थापित करना और बढ़ावा देना है।
अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने कूनो के विशेष चीता प्रबंधन क्षेत्र का जमीनी दौरा किया, जहां पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने उन्हें परियोजना की वर्तमान स्थिति, सुरक्षा और चीतों की सेहत के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
🐆 कूनो क्यों बना देश का पहला चीता पुनर्प्रवेश स्थल?
अधिकारियों ने राष्ट्रपति को अवगत कराया कि प्रोजेक्ट चीता के लिए देश भर में कूनो राष्ट्रीय उद्यान को सबसे उपयुक्त पाया गया था। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- अनुकूल आवासीय परिस्थितियां: यहाँ का खुला जंगल और घास के मैदान चीतों की रफ्तार के लिए बिल्कुल अनुकूल हैं।
- पर्याप्त शिकार आधार: पार्क में चीतों के भोजन के लिए चीतल, सांभर जैसे वन्य जीवों की प्रचुर संख्या मौजूद है।
- कम मानवीय हस्तक्षेप: इस क्षेत्र में इंसानी दखल अपेक्षाकृत बहुत कम है, जिससे चीते स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकते हैं।

🇧🇼 बोत्सवाना से आए चीतों की स्थिति पर विशेष चर्चा
राष्ट्रपति मुर्मू के इस दौरे में विशेष रूप से बोत्सवाना से लाए गए चीतों की प्रगति पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- नवंबर 2025 की यात्रा: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू की नवंबर 2025 में अफ्रीकी देश बोत्स्वाना की राजकीय यात्रा के दौरान आठ चीतों का प्रतीकात्मक हस्तांतरण (Symbolic Transfer) किया गया था।
- फरवरी 2026 में कूनो आगमन: बोत्सवाना द्वारा दान किए गए इन आठ चीतों के तीसरे जत्थे को इस वर्ष फरवरी 2026 में परियोजना के नवीनतम चरण के तहत सफलतापूर्वक कूनो उद्यान में लाकर शामिल किया गया था, जो अब यहाँ के वातावरण में पूरी तरह ढल रहे हैं।

📅 प्रोजेक्ट चीता: नामीबिया से बोत्सवाना तक का सफर
भारत में जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा सितंबर 2022 में इस परियोजना की शुरुआत की गई थी, जिसे राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा लागू किया जा रहा है। अब तक तीन अलग-अलग चरणों में चीते भारत लाए जा चुके हैं:
| चरण (Phase) | समय (Timeline) | देश जहाँ से चीते आए (Source Country) |
| पहला जत्था | सितंबर 2022 | नामीबिया (Namibia) |
| दूसरा जत्था | फरवरी 2023 | दक्षिण अफ्रीका (South Africa) |
| तीसरा जत्था | फरवरी 2026 | बोत्सवाना (Botswana) |




