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भोपाल/इंदौर। NEET-UG 2026 की परीक्षा केवल सवालों को हल करने की नहीं, बल्कि समय, धैर्य और सही दस्तावेजों को सहेजने की भी कड़ी परीक्षा साबित हुई। रविवार को परीक्षा केंद्रों के बाहर भावनाओं का सैलाब देखने को मिला—कहीं ऐन वक्त पर जरूरी दस्तावेज गायब मिलने से छात्रों के हाथ-पांव फूल गए, तो कहीं गलत परीक्षा केंद्र (रॉन्ग लोकेशन) पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई।
इंदौर में जहाँ पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता ने कई छात्रों का भविष्य डूबने से बचा लिया, वहीं भोपाल में नियमों की सख्ती के चलते महज कुछ सेकंड की देरी ने कई अभ्यर्थियों को परीक्षा से वंचित कर दिया। आइए जानते हैं परीक्षा के दिन की वो 6 भावुक कहानियां जो चर्चा का विषय बनी रहीं:
इंदौर में आधार कार्ड भूली रिया, महिला SI बनीं संकटमोचक
इंदौर के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय बाल विनय मंदिर में दोपहर 1:30 बजे एंट्री गेट बंद होने वाला था। तभी गीता भवन के एक हॉस्टल में रहने वाली छात्रा रिया जब डॉक्यूमेंट्स चेक कराने पहुँची, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई—उसका मूल पहचान पत्र (आधार कार्ड) गायब था।
- खौफ का माहौल: बिना ओरिजिनल आईडी एंट्री नामुमकिन थी। रिया इतनी घबरा गई कि थर-थर कांपने लगी।
- खाकी का मानवीय चेहरा: ड्यूटी पर तैनात पलासिया थाने की सब इंस्पेक्टर अभिरुचि कनौजिया ने मोर्चा संभाला। दोनों सहेलियों के पास मोबाइल न होने के कारण तुरंत रिया के माता-पिता को कॉल लगाया गया।
- समय पर मिली एंट्री: SI अभिरुचि ने व्हाट्सएप पर डिजिटल कॉपी मंगवाई, उसकी प्रामाणिकता जांची और गेट बंद होने से ठीक पहले रिया को परीक्षा हॉल के अंदर भिजवाया। SI अभिरुचि ने इसके अलावा कई और भटके हुए छात्रों को भी सही सेंटर तक पहुंचाया।

गूगल मैप की ‘गलत लोकेशन’ और मां की जांबाजी
सिलिकॉन सिटी (इंदौर) की रहने वाली एक मां अपनी बेटी को स्कूटी पर बैठाकर बाल विनय मंदिर स्कूल के लिए निकलीं। लेकिन रास्ते में उन्होंने गूगल मैप पर गलत लोकेशन फीड कर दी, जिससे वे किसी दूसरे स्कूल पहुंच गईं।
- जब तक उन्हें गलती का अहसास हुआ, एंट्री का आखिरी समय नजदीक आ चुका था।
- मां ने हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने बेहद तेज रफ्तार में स्कूटी दौड़ाई और ऐन मौके पर बेटी को सही सेंटर के गेट के अंदर दाखिल कराया। बेटी के अंदर जाते ही मां की आंखों से आंसू छलक पड़े।
भटक गया था आलीराजपुर का रीतेश, ACP ने सरकारी गाड़ी से पहुंचाया
आलीराजपुर का रहने वाला छात्र रीतेश इंदौर में ‘SGSITS कॉलेज’ सेंटर ढूंढ रहा था। स्थानीय रास्तों से अनजान रीतेश रास्ता भटककर हाईकोर्ट के बजाय जिला कोर्ट की तरफ पैदल निकल गया और सेंटर से काफी दूर चला गया।
- ACP ने बढ़ाया हाथ: क्षेत्र का दौरा कर रहे एसीपी (कोतवाली) विनोद दीक्षित को छात्र ने परेशान होकर हाथ दिया और कहा—“सर, मुझे सेंटर पहुंचा दो, मैं बहुत परेशान हो गया हूं।”
- एसीपी दीक्षित ने तुरंत उसके दस्तावेज देखे और बिना एक सेकंड गंवाए उसे अपनी सरकारी कार में बैठाकर समय पर SGSITS कॉलेज पहुंचाया। इसी तरह एसीपी (जूनी इंदौर) विजय चौधरी ने भी छात्रा श्रेया सिंह और उनकी मां को गलत सेंटर से उठाकर अपनी गाड़ी के जरिए ‘नवीन विधि कॉलेज’ पहुंचाया।

भोपाल में ‘डिजिटल कॉपी’ पर अड़े सुरक्षाकर्मी, ओरिजिनल के लिए लगानी पड़ी दौड़
भोपाल के पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय में नियमों की कड़ी सख्ती देखने को मिली। एक छात्र अपना पहचान पत्र घर भूल आया था।
- छात्र ने मोबाइल पर अपने परिजनों से डिजिटल कॉपी मंगवाई, लेकिन गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने डिजिटल दस्तावेज स्वीकार करने से साफ मना कर दिया।
- छात्र गेट से वापस भागा और बाहर इंतजार कर रहे अपने परिजनों से ओरिजिनल कार्ड लिया। कड़ी मशक्कत और समय रहते ओरिजिनल दस्तावेज दिखाने के बाद ही उसे अंदर जाने की अनुमति मिल सकी।
महज़ 50 सेकंड की देरी… और बंद हो गया भविष्य का गेट
सबसे दुखद तस्वीरें भोपाल के सरोजिनी सुभाष उच्चतर माध्यमिक उत्कृष्ट विद्यालय से आईं, जहां तीन छात्राओं की परीक्षा सिर्फ 40 से 50 सेकंड की देरी के कारण छूट गई।
- बंद हो गया गेट: गेट बंद होने के ठीक 50 सेकंड बाद छात्राएं रोती-बिलखती गेट के सामने पहुंचीं, लेकिन अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए गेट खोलने से इनकार कर दिया।
- छात्रा महल दांगी ने बताया कि बाहर रोल नंबर ढूंढने के फेर में उसकी एंट्री छूट गई। वहीं एक अन्य छात्रा जो समय पर तो आ गई थी, लेकिन फोटोकॉपी न होने के कारण बाहर रह गई और दोबारा आने पर गेट बंद मिला।

📋 NEET-UG परीक्षा के दिन की बड़ी सीख (Key Takeaways)
| समस्या (Problem) | समाधान/बचाव (Solution) |
| रास्ते का भ्रम | परीक्षा के एक दिन पहले ही सेंटर की सटीक लोकेशन जाकर खुद चेक करें। |
| पहचान पत्र की समस्या | हमेशा ओरिजिनल पहचान पत्र और उसकी 2 फोटोकॉपी साथ रखें; केवल डिजिटल पर निर्भर न रहें। |
| समय का प्रबंधन | रिपोर्टिंग टाइम से कम से कम 1 घंटे पहले केंद्र पर पहुंचने का लक्ष्य रखें। |




