आम डिप्लोमेसी: भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 82 देशों के राजनयिकों को भेजे भारतीय ‘Premium Mangoes’, ‘केसर’ और ‘लंगड़ा’ से महकेगा दूतावास

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने देश की राजधानी में तैनात 82 देशों के विदेशी राजनयिकों (Diplomats) को भारत के सबसे मशहूर और प्रीमियम आमों के विशेष रूप से तैयार किए गए गिफ्ट हैम्पर्स भेजे हैं। इस अनूठी सांस्कृतिक पहुंच पहल (Cultural Outreach Initiative) के जरिए भारत की समृद्ध बागवानी विरासत और वैश्विक स्तर पर पसंद किए जाने वाले इस समर-फ्रूट का प्रदर्शन किया गया है।

👑 इन 4 मशहूर वैरायटी के आमों से सजे हैं खास बॉक्स

विदेशी राजनयिकों को भेजे गए इन खास बॉक्सों में भारत के अलग-अलग राज्यों की चार सबसे प्रतिष्ठित और स्वाद-सुगंध के लिए मशहूर आमों की किस्मों को शामिल किया गया है:

  1. गीर केसर (Gir Kesar): गुजरात का विश्व प्रसिद्ध सुगंधित आम।
  2. मंगनापल्ली (Banganapalle): आंध्र प्रदेश का बेहद लोकप्रिय और रसीला आम।
  3. दशहरी (Dussehri): उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद की शान।
  4. बनारसी लंगड़ा (Benarasi Langra): यूपी के वाराणसी का अपने खास तीखे-मीठे स्वाद के लिए मशहूर आम।

🤝 कूटनीति के साथ भेजा खास व्यक्तिगत संदेश

राजनयिकों को आमों के साथ-साथ नितिन नवीन की ओर से एक व्यक्तिगत पत्र (Personal Note) भी भेजा गया है। इस पत्र में उन्होंने सभी राजनयिकों को शुभकामनाएं देते हुए ‘फलों के राजा’ आम के सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।

  • दोस्ती का प्रतीक: उन्होंने आम को भारत की कृषि विरासत, अतिथि सत्कार (Hospitality) और अटूट दोस्ती व सद्भावना के प्रतीक के रूप में वर्णित किया।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस अनोखे ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ के जरिए वैश्विक राजनयिक समुदाय के साथ भारत के संबंधों को और अधिक मधुर तथा मजबूत बनाने का प्रयास किया गया है।

🎙️ पीएम मोदी के ‘मन की बात’ का भी दिखा असर

गौरतलब है कि भारत दुनिया में आम के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने ‘मन की बात’ (Mann ki Baat) कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले आमों की विविधताओं पर विस्तार से चर्चा की थी। पीएम ने कहा था कि भारत के हर क्षेत्र के पास अपना एक अनूठा आम है, जिसका स्वाद और सुगंध वहां की मिट्टी की पहचान बयां करती है। बीजेपी अध्यक्ष की यह पहल इसी सोच को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देती नजर आ रही है।

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