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सीहोर/भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के अंतर्गत प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय (भोपाल) में हुई जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभागों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए।
आगामी 6 महीनों के भीतर प्रदेश के 13 जिलों में लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने वाली विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा, जिनकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
📍 इन 13 जिलों के किसानों को मिलेगा सिंचाई का तोहफा
कृषक कल्याण वर्ष में जिन जिलों की पूर्ण हो चुकी सिंचाई परियोजनाओं का लोकार्पण होने जा रहा है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला।
🌊 स्लीमनाबाद टनल: डेढ़ दशक का इंतजार खत्म, उद्घाटन की तैयारी
मुख्यमंत्री ने नर्मदा की अमृत धारा को सोन नदी से जोड़ने वाली ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण स्लीमनाबाद टनल के उद्घाटन के लिए आवश्यक तैयारियां तुरंत पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
- परियोजना का महत्व: बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे बड़ी नहर प्रणाली का हिस्सा है।
- इन जिलों को फायदा: इसके जरिए जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1,500 गांवों की करीब 2.50 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलेगा।
📊 स्लीमनाबाद टनल के तकनीकी मापदंड:
- कुल लंबाई: 11.952 किलोमीटर (किमी 104 से 116 के मध्य)
- जल प्रवाह क्षमता: 152 क्यूमेक
- टनल का व्यास (Diameter): 10.140 मीटर
- विशेषता: यह प्रदेश की सबसे ज्यादा (227 क्यूमेक) डिस्चार्ज कैपेसिटी वाली नहर है।

🏛️ भारत सरकार को भेजा गया ‘केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना’ का प्रस्ताव
बैठक में जानकारी दी गई कि केन-मंदाकिनी लिंक अंतर प्रांतीय (अन्तर्राज्यीय) सिंचाई परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव भारत सरकार को प्रेषित कर दिया गया है।
- लागत: ₹8,400 करोड़ से अधिक।
- क्षमता: 93 हजार 310 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता का विकास होगा।
- बिजली उत्पादन: इसके जरिए 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जा सकेगा।
- विशेष अवयव: इस पूरी परियोजना के अंतर्गत 20 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण भी किया जाएगा।
🎪 सिंहस्थ 2028 की तैयारियां तेज: शिप्रा घाटों का 60% काम पूरा
उज्जैन में आयोजित होने वाले आगामी सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए सीएम डॉ. यादव ने सिंहस्थ से जुड़ी 3 बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की:
- शिप्रा तट पर घाट निर्माण: करोड़ों श्रद्धालुओं द्वारा सुविधाजनक पुण्य स्नान के लिए 29 किलोमीटर की लंबाई में घाटों का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसका 60% कार्य पूर्ण हो चुका है।
- सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना: इस परियोजना का 82% कार्य पूरा हो गया है।
- कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना: इस कार्य में अब तक 66% प्रगति हो चुकी है।

💰 केन-बेतवा और कारम बांध परियोजना पर लेटेस्ट अपडेट
- केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना: बुंदेलखंड के 10 जिलों में 8.11 लाख हेक्टेयर वार्षिक सिंचाई और 130 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन वाली इस परियोजना में भू-अर्जन और पुनर्वास के लिए विशेष पैकेज के तहत 90% भुगतान पूरा किया जा चुका है।
- कारम बांध (धार): वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए इस बांध का वर्ष 2024 से शुरू हुआ पुनर्निर्माण कार्य अब लगभग शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है।
- बीना कॉम्प्लेक्स बहुउद्देश्य परियोजना: इसके अंतर्गत चकरपुर एवं मड़िया बांध का काम पूरा कर लिया गया है।
📈 सिंचित रकबे में रिकॉर्ड वृद्धि: मध्य प्रदेश में निर्मित, निर्माणाधीन और स्वीकृत परियोजनाओं को मिला दिया जाए तो आने वाले समय में प्रदेश का कुल सिंचित क्षेत्र 108 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। अकेले पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में 10 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।




