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सीहोर (क्राइम डेस्क)। सीहोर जिला जेल में न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में बंद एक विचाराधीन कैदी श्रीराम वर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। मंगलवार को मृतक के आक्रोशित परिजन और बड़ी संख्या में कालापीपल गांव के ग्रामीण सीहोर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और मामले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच के लिए एसपी को ज्ञापन सौंपा।
😤 “समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान”— परिजनों का संगीन आरोप
एसपी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे परिजनों और ग्रामीणों ने जेल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की:
- इलाज में कोताही का आरोप: परिजनों का सीधा आरोप है कि जेल के अंदर श्रीराम वर्मा की तबीयत काफी ज्यादा बिगड़ चुकी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें समय पर उचित चिकित्सा और इलाज मुहैया नहीं कराया।
- लापरवाही ने ली जान: ग्रामीणों ने कहा कि यदि जेल अधिकारी समय रहते उन्हें किसी बड़े अस्पताल में भर्ती कराते, तो आज श्रीराम वर्मा जीवित होते। उन्होंने दोषी जेल अधिकारियों पर तत्काल सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

🚔 पुलिस ने दिया निष्पक्ष जांच का भरोसा; पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
प्रदर्शन और बढ़ते आक्रोश को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुनी:
- पारदर्शी जांच का आश्वासन: पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को आश्वस्त किया कि इस पूरे मामले की पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी।
- दोषियों पर होगी कार्रवाई: पुलिस ने कहा कि जांच और पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर अगली कार्रवाई होगी। यदि जेल प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस भरोसे के बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
🗓️ क्या है पूरा मामला? (26 अप्रैल के खूनी संघर्ष से जेल तक का सफर)
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो महीने पहले एक जमीनी विवाद से हुई थी:
- 26 अप्रैल: जमीन विवाद और मारपीट: इछावर थाना क्षेत्र के ग्राम कालापीपल में पुराने जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। फरियादी नेपाल वर्मा के भाई अनूप सिंह जब खेत पर मोटर चालू करने गए थे, तब विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद लाठी-डंडों और चाकू से हमला हुआ, जिसमें कैलाश वर्मा समेत परिवार के कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
- FIR और गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में शिकायत के आधार पर अनार सिंह वर्मा, श्रीराम वर्मा, मनोज वर्मा, सीता बाई और दुर्गाप्रसाद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था।
- न्यायिक अभिरक्षा: गिरफ्तारी के बाद कोर्ट के आदेश पर आरोपी श्रीराम वर्मा को सीहोर जिला जेल भेज दिया गया था।
- 24 जून: संदिग्ध मौत: जेल में बंद रहने के दौरान ही 24 जून की सुबह श्रीराम वर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद से ही परिवार सदमे में है और लगातार न्याय की गुहार लगा रहा है।

🔍 मौत की असली वजह क्या? सस्पेंस बरकरार
कैदी श्रीराम वर्मा की मौत आखिर किन कारणों से हुई, यह राज अभी भी पूरी तरह गहराया हुआ है। पुलिस और जेल प्रशासन का कहना है कि वास्तविक कारणों का खुलासा विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। तब तक क्षेत्र में इस मामले को लेकर तनाव और राजनैतिक सरगर्मी बनी हुई है।




