सीहोर में महा-लापरवाही: मौत के 12 साल बाद जारी हुआ बिजली कनेक्शन; अब मृतक के बेटे पर ₹1.70 लाख का बिल चुकाने का दबाव, कलेक्टर तक पहुंचा मामला

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सीहोर बिजली विभाग का अजूबा! मौत के 12 साल बाद दे दिया कनेक्शन, अब बेटे से मांग रहे 1.70 लाख का बिल; कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश!"

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सीहोर (विशेष संवाददाता)। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले से बिजली वितरण कंपनी (विद्युत मंडल) का एक ऐसा अजीबो-गरीब और हैरान कर देने वाला कारनामा सामने आया है, जिसने विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कंपनी ने एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर नया बिजली कनेक्शन मंजूर कर दिया, जिनकी मौत 12 साल पहले हो चुकी थी।

अब हद तो यह है कि विभाग उस मृत व्यक्ति के बेटे पर 1 लाख 70 हजार रुपए से ज्यादा का बकाया बिजली बिल जमा करने का मानसिक दबाव बना रहा है। इस विभागीय प्रताड़ना से तंग आकर परेशान बेटे ने मंगलवार को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

🗓️ 1993 में मौत, 2005 में कनेक्शन; समझिए फर्जीवाड़े का पूरा खेल

यह पूरा मामला सीहोर जिले के ग्राम बरखेड़ा देवा का है, जो किसी फिल्मी कहानी जैसा प्रतीत होता है:

  • कागजों पर ‘जिंदा’ हुए मृतक: ग्राम बरखेड़ा देवा के निवासी लक्ष्मी नारायण का निधन वर्ष 1993 में ही हो गया था। लेकिन विभाग के ‘जादूई’ सिस्टम ने उनके निधन के 12 साल बाद यानी वर्ष 2005 में उनके नाम पर एक नया घरेलू बिजली कनेक्शन जारी कर दिया।
  • फर्जी दस्तावेजों का खेल: आरोप है कि गांव के ही किसी अज्ञात शातिर व्यक्ति ने मृतक लक्ष्मी नारायण के फर्जी दस्तावेज तैयार किए, विभाग के भ्रष्ट कर्मचारियों से साठगांठ की और सालों तक धड़ल्ले से बिजली का उपयोग करता रहा।

😤 शिकायत के बाद भी सोता रहा विभाग, बिल पहुंचा ₹1.70 लाख के पार

मृतक के बेटे दीपक दांगी को जब अचानक अपने दिवंगत पिता के नाम से भारी-भरकम बिजली के बिल मिलने शुरू हुए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई:

  • मृत्यु प्रमाण पत्र भी दिखाया: दीपक ने तुरंत पिता का ओरिजिनल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) निकाला और बिजली दफ्तर के चक्कर काटे। उन्होंने लिखित शिकायत देकर साफ किया कि उनके पिता की मौत 1993 में हो चुकी है, लिहाजा यह कनेक्शन पूरी तरह फर्जी है और इसे तुरंत काटा जाए।
  • विभाग की तानाशाही: दीपक का आरोप है कि इस स्पष्ट शिकायत के बावजूद लापरवाह बिजली अफसरों ने कान में तेल डाल लिया और कनेक्शन नहीं काटा। नतीजा यह हुआ कि बिल पर ब्याज जुड़ता गया और अब यह राशि 1.70 लाख रुपए से अधिक हो चुकी है, जिसे जबरन वसूलने के लिए अधिकारी अब दीपक को परेशान कर रहे हैं।

⚖️ जनसुनवाई में गूंजा मुद्दा; कलेक्टर ने दिए कड़ी जांच के आदेश

बिजली कंपनी की इस तानाशाही से परेशान होकर दीपक दांगी मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर के सामने विभाग के इस सफेद झूठ और फर्जीवाड़े के सारे सबूत पेश किए।

  • दोषियों पर गिरेगी गाज: मामले की गंभीरता और विभाग की फजीहत होते देख कलेक्टर ने पीड़ित दीपक को पूरी सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन दिया है। कलेक्टर ने बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे मामले की फौरन जांच करने और फर्जीवाड़ा करने वाले अज्ञात व्यक्ति समेत सांठगांठ करने वाले विभागीय दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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