अमरनाथ यात्रा 2026: 57 दिन की पवित्र यात्रा शुरू, पहले दो जत्थों में पहुंचे 8,000+ श्रद्धालु, जानें इतिहास और जरूरी नियम

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श्रीनगर/जम्मू: भोलेनाथ के भक्तों का इंतजार खत्म हो गया है। पवित्र अमरनाथ यात्रा आज से आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। इस साल यह यात्रा 28 अगस्त तक यानी पूरे 57 दिनों तक चलेगी। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु समुद्र तल से 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले बर्फ के शिवलिंग के दर्शन करेंगे।

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने 29 जून को ही बाबा बर्फानी की प्रथम पूजा की थी, जिसके बाद गुरुवार को उन्होंने जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से 4,822 तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके तुरंत बाद, शुक्रवार सुबह 4 बजे 3,865 श्रद्धालुओं का दूसरा जत्था भी रवाना हो चुका है।

🗺️ अमरनाथ यात्रा के 2 मुख्य रास्ते

अमरनाथ गुफा तक पहुँचने के लिए श्रद्धालु दो अलग-अलग मार्गों का उपयोग करते हैं:

  1. पारंपरिक मार्ग (नुनवान-पहलगाम): यह रास्ता थोड़ा लंबा है, जिसकी कुल दूरी 48 किलोमीटर है।
  2. शॉर्टकट मार्ग (बालटाल): गांदरबल जिले से शुरू होने वाला यह रास्ता सिर्फ 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन यहाँ चढ़ाई काफी सीधी है।

🏥 खराब मौसम के बीच प्रशासन के कड़े इंतजाम

मौसम विभाग ने 6 जुलाई तक दोनों रूटों पर भारी बारिश की आशंका जताई है। बालटाल रूट पर बरारी से रेलपथरी के बीच भूस्खलन (landslide) का खतरा बना हुआ है। इसे देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के लिए खास इंतजाम किए गए हैं:

  • 100-100 बेड के हाईटेक अस्पताल: दोनों ही रास्तों पर अत्याधुनिक अस्थायी अस्पताल बनाए गए हैं। इसके अलावा डोमेल गेट, रेलपथरी, पिस्सू टॉप और शेषनाग कैंप में इमरजेंसी मेडिकल एड सेंटर स्थापित हैं। यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं।
  • वेदर अपडेट स्क्रीन्स व वॉटरप्रूफ डोम: दोमेल रूट पर चार बड़ी स्क्रीनों के जरिए लाइव मौसम की जानकारी दी जा रही है। साथ ही बालटाल रूट पर 12 जगहों पर वॉटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं।
  • रहने और खाने की व्यवस्था: बालटाल बेस कैंप में 57 लंगर लगाए गए हैं। श्राइन बोर्ड ने तंबू लगाए हैं जहाँ मात्र ₹800 तक में बेड मिल रहे हैं। यहाँ एक साथ 30 हजार लोग रुक सकते हैं।

📶 मोबाइल कनेक्टिविटी और ऑन-द-स्पॉट रजिस्ट्रेशन

  • सिम कार्ड सुविधा: अमरनाथ के पहाड़ी इलाकों में केवल पोस्टपेड सिम ही काम करती है। इसके लिए बीएसएनएल, जियो और एयरटेल ने दोनों बेस कैंपों पर विशेष काउंटर खोले हैं, जहाँ यात्री अपनी आईडी दिखाकर अस्थायी पोस्टपेड सिम ले सकते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन: अब तक 3.90 लाख से ज्यादा लोग एडवांस रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। जो लोग रह गए हैं, उनके लिए जम्मू में ऑन-द-स्पॉट (तुरंत) रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।

⚠️ यात्रियों के लिए जरूरी गाइडलाइन: यात्रा पर जाते समय अपने साथ मेडिकल सर्टिफिकेट, 4 पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, RFID कार्ड और ट्रैवल एप्लिकेशन फॉर्म जरूर रखें। इसके साथ ही गरम कपड़े, रेनकोट, ट्रेकिंग स्टिक और अपनी जरूरी दवाइयाँ साथ ले जाना न भूलें। शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए प्राणायाम और वॉक करने की सलाह दी गई है।

📜 सदियों पुराना है अमरनाथ यात्रा का इतिहास

अमरनाथ गुफा का इतिहास बेहद गौरवशाली और प्राचीन है। आइए जानते हैं इससे जुड़े 4 बड़े ऐतिहासिक तथ्य:

क्र.सं.काल / इतिहासमुख्य ऐतिहासिक संदर्भ
1राजतरंगिणी (12वीं सदी)कल्हण द्वारा 1148–1150 ईस्वी में रचित ‘राजतरंगिणी’ में इस गुफा का नाम ‘अमरेश्वर’ मिलता है। इसे यात्रा का सबसे पुराना और स्पष्ट प्रमाण माना जाता है।
2मुगल काल (16वीं सदी)अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फ़ज़ल ने अपनी किताब ‘आइने-अकबरी’ में इस गुफा और समय के साथ आकार बदलने वाले बर्फ के शिवलिंग का जिक्र किया है।
3बुटा मलिक की कथा19वीं शताब्दी की एक लोककथा के अनुसार, बुटा मलिक नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले की पोटली दी थी, जो बाद में सोना बन गई। माना जाता है कि उन्होंने गुफा की ‘पुनर्खोज’ की थी।
4ब्रिटिश काल से श्राइन बोर्ड19वीं सदी के अंत में जम्मू-कश्मीर के डोगरा राजाओं और ब्रिटिश काल में यह यात्रा संगठित हुई। साल 2000 में श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के गठन के बाद व्यवस्थाएं पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित कर दी गईं।

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