drnewsindia.com
Sehore Local Impact (07 July 2026): सीहोर जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में एक ऐसा मार्मिक मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। रेहटी तहसील के ग्राम मोगरा की रहने वाली 95 वर्षीय बुजुर्ग महिला वक्ता बाई व्हीलचेयर पर बैठकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। उन्होंने किसी और के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने ही सगे बेटों के खिलाफ कलेक्ट्रेट में न्याय की गुहार लगाई।
बुजुर्ग मां का गंभीर आरोप है कि उनके तीनों बेटों ने 15 एकड़ उपजाऊ जमीन अपने नाम कराने के बाद उन्हें बेसहारा छोड़ दिया और अब वे भरण-पोषण की जिम्मेदारी निभाने से भी पूरी तरह मुकर गए हैं।
📌 इस मार्मिक मामले की मुख्य बातें (Key Highlights)
- 📍 पीड़ित बुजुर्ग: वक्ता बाई (उम्र 95 वर्ष), निवासी- ग्राम मोगरा, तहसील रेहटी (सीहोर)।
- 🌾 जमीन का लालच: पति की मौत के बाद बुजुर्ग मां ने अपनी 15 एकड़ उपजाऊ जमीन तीनों बेटों में बराबर बांट दी थी।
- 💔 वादाखिलाफी: जमीन नाम होते ही बेटों के बदले सुर; हर महीने ₹10,000 भरण-पोषण देने के वादे से पलटे।
- ⚖️ प्रशासनिक एक्शन: अतिरिक्त कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एसडीएम (SDM) को जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

💵 जमीन बंटवारे के समय हुआ था हर महीने ₹10,000 देने का वादा
वक्ता बाई ने अतिरिक्त कलेक्टर को दिए अपने लिखित आवेदन में अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि पति के निधन के बाद उन्होंने बेटों के भविष्य को देखते हुए अपनी पूरी पैतृक जमीन (15 एकड़) तीनों बेटों के नाम बराबर-बराबर कर दी थी।
मां का दर्द: “जमीन ट्रांसफर करते समय बेटों ने कसम खाई थी कि वे आखिरी सांस तक अपनी बूढ़ी मां की सेवा करेंगे और हर महीने 10-10 हजार रुपये भरण-पोषण और दवाइयों के खर्च के लिए देंगे। रजिस्ट्री होने के कुछ महीनों तक तो सब ठीक रहा, लेकिन जैसे ही जमीन पर उनका पूरा मालिकाना हक आया, उनके व्यवहार बदल गए।”
🧑विंडो दर-दर भटकने को मजबूर; अब मां की मांग— ‘वापस मिले जमीन’
बुजुर्ग महिला ने बताया कि अब उनके पास न तो रहने का कोई निश्चित ठिकाना है और न ही दो वक्त की रोटी के लिए पैसे। कलयुगी बेटों की बेरुखी से तंग आकर आखिरकार उन्हें इस उम्र में व्हीलचेयर का सहारा लेकर जिला मुख्यालय आना पड़ा। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि चूंकि बेटों ने कानूनी और नैतिक वादा तोड़ा है, इसलिए उनके नाम की गई जमीन की रजिस्ट्री को तुरंत शून्य (निरस्त) कर उन्हें उनकी जमीन वापस दिलाई जाए, ताकि वे अपना स्वाभिमान से गुजारा कर सकें।

👮 अतिरिक्त कलेक्टर सख्त, एसडीएम को दिए त्वरित जांच के निर्देश
जनसुनवाई में आए इस बेहद संवेदनशील मामले को सुनते ही कलेक्ट्रेट के आला अधिकारी गंभीर हो गए। अतिरिक्त कलेक्टर ने तुरंत रेहटी क्षेत्र के संबंधित एसडीएम (SDM) को फोन कर मामले की पूरी फाइल सौंपी है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ (Senior Citizens Act) के तहत इस मामले की त्वरित जांच की जाएगी। यदि बेटों द्वारा मां को प्रताड़ित करने और भरण-पोषण न देने की बात सच पाई जाती है, तो बेटों पर दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जमीन की रजिस्ट्री निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।




