सीहोर में खुले में पड़ी मिलीं लाखों की पाठ्यपुस्तकें, शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर उठे सवाल

0
5

drnewsindia.com/सीहोर। सीहोर में विद्यार्थियों के लिए आईं लाखों रुपए मूल्य की पाठ्यपुस्तकें खुले में पड़ी मिलने का मामला सामने आया है। आवासीय खेलकूद संस्थान के तारामंडल परिसर के बाहर बड़ी संख्या में किताबों का ढेर दिखाई देने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन पुस्तकों को सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया तो बारिश और मौसम की मार से इन्हें नुकसान पहुंच सकता है, जिससे सरकारी धन की भी बर्बादी होगी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तारामंडल परिसर के बाहर बड़ी मात्रा में पाठ्यपुस्तकें खुले में रखी हुई थीं। बताया जा रहा है कि ये पुस्तकें विद्यार्थियों में वितरण के लिए लाई गई हैं, लेकिन उचित रखरखाव नहीं होने के कारण इनके खराब होने की आशंका बढ़ गई है। घटना की जानकारी सामने आने के बाद लोगों ने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

अधिकारियों ने साधी चुप्पी

मामले में जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं आवासीय खेलकूद संस्थान के प्राचार्य आलोक शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस मामले से उनके संस्थान का कोई संबंध नहीं है।

पहले शिक्षा विभाग का कार्यालय, अब बना स्टोर

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार जिस तारामंडल परिसर के बाहर पुस्तकें मिली हैं, वहां पहले शिक्षा विभाग का कार्यालय संचालित होता था। नया कार्यालय बनने के बाद इस परिसर का उपयोग पुस्तक वितरण केंद्र के स्टोर के रूप में किया जा रहा है। ऐसे में किताबों के खुले में पड़े मिलने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से खरीदी गई पाठ्यपुस्तकों का सुरक्षित रखरखाव और समय पर वितरण सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें इस बात पर हैं कि जांच के बाद शिक्षा विभाग क्या कार्रवाई करता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here