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सूरत, 9 जुलाई: सूरत में हुई 358 मिमी (14 इंच) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने वराछा के मशहूर इलेक्ट्रॉनिक हब पोद्दार आर्केड को पूरी तरह मलबे और पानी में तब्दील कर दिया है। मंगलवार दोपहर को महज 30 मिनट के भीतर बाढ़ का पानी पहली मंजिल तक पहुंच गया, जिससे व्यापारियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
मुख्य घटनाक्रम और नुकसान:
- ₹150 करोड़ का फटका: बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर की 100 से अधिक दुकानों में रखा मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कीमती स्टॉक पूरी तरह बर्बाद हो गया। व्यापारियों का अनुमान है कि नुकसान ₹100 से ₹150 करोड़ के बीच है।
- मेट्रो निर्माण पर फूटा गुस्सा: व्यापारियों का सीधा आरोप है कि इलाके में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण मुख्य ड्रेनेज लाइनें ब्लॉक हो गईं, जिससे पानी की निकासी ठप हो गई।
- गृह मंत्री का दौरा: बढ़ते आक्रोश को देखते हुए गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने खुद ग्राउंड जीरो का दौरा किया। उन्होंने व्यापारियों को नुकसान के तुरंत सरकारी सर्वे और उचित मुआवजे का आश्वासन दिया है।

सूरत नगर निगम (SMC) अब भारी पंपों के जरिए पानी निकालने में जुटी है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही ने उनकी सालों की कमाई एक झटके में डुबा दी।
करोड़ों के नुकसान का अनुमान और मेट्रो निर्माण पर सवाल
परिसर के एसोसिएशन और स्थानीय व्यापारियों के प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस जलभराव के कारण 100 करोड़ रुपये से 150 करोड़ रुपये के बीच का भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

“हमारी दुकानों में रखा पूरा स्टॉक और कीमती इलेक्ट्रॉनिक्स पानी में डूब गए। प्रशासन की तरफ से समय पर कोई मदद या पानी निकालने की व्यवस्था नहीं की गई।”
— प्रभावित स्थानीय व्यापारी
व्यापारियों ने इस भीषण जलभराव के लिए सीधे तौर पर इलाके में चल रहे मेट्रो निर्माण कार्य को जिम्मेदार ठहराया है। उनका दावा है कि निर्माण कार्य के कारण क्षेत्र की मुख्य ड्रेनेज (जल निकासी) व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे महज आधे घंटे की बारिश का पानी भी बाहर नहीं निकल सका।




