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Railway & Consumer Desk (11 July 2026): भारतीय रेलवे की सबसे वीआईपी और प्रीमियम ट्रेनों में शुमार ‘नई दिल्ली–रानी कमलापति शताब्दी एक्सप्रेस’ (ट्रेन नंबर 12002) में शनिवार सुबह यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। दिल्ली से भोपाल आ रही इस ट्रेन के C-4 कोच में सफर कर रहे बच्चों सहित करीब 74 यात्रियों को नाश्ते में एक्सपायरी (अवधि पार) ब्रेड परोस दी गई।
चौंकाने वाली बात यह है कि शनिवार 11 जुलाई को परोसी गई इस ब्रेड के पैकेट पर ‘यूज़ बाय डेट’ (Use By Date) 10 जुलाई 2026 अंकित थी। अधिकांश यात्री अनजाने में यह ब्रेड खा चुके थे, जिसके बाद ट्रेन के भीतर ही फूड पॉइजनिंग (उल्टी-दस्त) की आशंका को लेकर हड़कंप मच गया और यात्रियों ने ‘रेल मदद’ ऐप पर शिकायतों की झड़ी लगा दी।
📌 इस रेल कैटरिंग लापरवाही की मुख्य बातें (Key Highlights)
- 🚄 प्रभावित ट्रेन: 12002 नई दिल्ली–रानी कमलापति (भोपाल) शताब्दी एक्सप्रेस।
- 🥪 लापरवाही का सबूत: 11 जुलाई की सुबह नाश्ते में दी गई ब्रेड, जिसकी मियाद 10 जुलाई को ही खत्म हो चुकी थी।
- 🧒 74 यात्री शिकार: C-4 कोच के अलावा बाहर रखे कैटरिंग पैकेट्स में भी एक्सपायरी ब्रेड मिलने से अन्य कोचों में भी इसके परोसे जाने की आशंका।
- 👮 रेलवे का जवाब: IRCTC के रीजनल अधिकारी ने इस पूरी गड़बड़ी का ठीकरा नॉर्दर्न रेलवे (उत्तर रेलवे) के सिर फोड़ दिया है।

🛑 ब्रेड खाने के बाद पैकेट पर नजर पड़ी, तो उड़े यात्रियों के होश
दिल्ली से भोपाल की यात्रा कर रहे सीनियर एनालिस्ट प्रणव ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि सुबह के समय वेंडर्स ने सभी को सामान्य रूप से नाश्ता सर्व किया। ट्रेन की गति के साथ अधिकांश लोग नाश्ता खत्म कर चुके थे। तभी पीछे की सीट पर बैठे एक सजग यात्री की नजर पैकेट के पीछे छपी तारीख पर गई, जिस पर साफ-साफ ‘यूज़ बाय: 10 जुलाई’ लिखा था।
जैसे ही यह खबर कोच में फैली, यात्रियों में हड़कंप मच गया। एक अन्य यात्री अशोक कालिया ने नाराजगी जताते हुए कहा:
“जब हम शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेन का भारी-भरकम किराया देते हैं, तो क्या हमें जहरीला या एक्सपायरी खाना परोसा जाएगा? आज तो यह लापरवाही पकड़ में आ गई, लेकिन भगवान जाने पहले कितनी बार यात्रियों को ऐसा बासी और एक्सपायरी खाना खिलाया गया होगा। यह रेलवे की पूरी खानपान व्यवस्था पर से भरोसा उठाने वाली घटना है।”
🤷♂️ IRCTC अधिकारी ने झाड़ा पल्ला— “यह हमारा खाना नहीं, नॉर्दर्न रेलवे की जिम्मेदारी”
इस बेहद संवेदनशील और यात्रियों की सेहत से जुड़े मामले पर जब IRCTC के क्षेत्रीय अधिकारी मनोरंजन बिनकर से सीधी बात की गई, तो उन्होंने स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई का आश्वासन देने के बजाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि: “यह शताब्दी एक्सप्रेस नॉर्दर्न रेलवे (Northern Railway) जोन की है और इसका पूरा कैटरिंग फूड वहीं से लोड होकर आता है।”
बता दें कि रेलवे के नियमों के मुताबिक, ऑनबोर्ड कैटरिंग और भोजन की गुणवत्ता की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित रेलवे जोन की ही होती है, लेकिन आईआरसीटीसी के इस टालमटोल वाले रवैये से नाराज यात्रियों ने अब ऑनलाइन उपभोक्ता आयोग (कंज्यूमर कमीशन) पोर्टल पर भी केस दर्ज कराना शुरू कर दिया है।

😡 लगातार दूसरे दिन विवादों में शताब्दी का खाना; रेल मंत्री से भी शिकायत
शताब्दी एक्सप्रेस में खानपान की गुणवत्ता का गिरता स्तर कोई एक दिन की बात नहीं है। ठीक एक दिन पहले यानी 10 जुलाई को भी विपरीत दिशा से चलने वाली 12001 शताब्दी एक्सप्रेस (भोपाल से दिल्ली) के एक यात्री ने सोशल मीडिया पर खाने की बेहद खराब क्वालिटी और कम क्वांटिटी (मात्रा) को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईआरसीटीसी को टैग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।
यात्री का आरोप था कि रेलवे पैसे तो पूरे वसूल रहा है, लेकिन कैटरर खाने की थाली में कटौती कर रहे हैं। लगातार दो दिनों में सामने आईं इन बड़ी शिकायतों ने रेल महकमे की विजिलेंस और क्वालिटी चेक व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
📢 DR News India की नजर: ट्रेनों में वेंडर्स और कैटरर्स की यह मनमानी यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है। देखना होगा कि रेल मंत्रालय इस एक्सपायरी ब्रेड कांड के दोषियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई करता है।
स्रोतः रेल मदद (RailMadad) शिकायत पोर्टल, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन एवं शताब्दी एक्सप्रेस पैसेंजर एसोसिएशन, भोपाल।




