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भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। टिकट की घोषणा के साथ ही दतिया में भाजपा के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए। नरोत्तम समर्थकों ने बाजार बंद कराए, सड़क पर प्रदर्शन किया और हाईवे जाम कर दिया। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने छह थानों का पुलिस बल तैनात किया।
प्रचार शुरू कर चुके थे नरोत्तम मिश्रा
भाजपा के टिकट को लेकर नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह आश्वस्त माने जा रहे थे। उन्होंने प्रत्याशी घोषित होने से पहले ही जनसंपर्क और प्रचार अभियान शुरू कर दिया था। विभिन्न सभाओं में वे जनता से संवाद कर रहे थे और अपनी चुनावी तैयारी में जुटे थे। ऐसे में टिकट कटने का फैसला राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है।
संघ से जुड़े आशुतोष तिवारी पर भाजपा ने जताया भरोसा
भाजपा ने दतिया से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं और भाजपा संगठन में पूर्व संभागीय संगठन मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। माना जा रहा है कि संगठन की पसंद के चलते पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है।

टिकट कटते ही फूटा समर्थकों का गुस्सा
टिकट बदलने के फैसले के बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए। दतिया और आसपास के क्षेत्रों में प्रदर्शन हुए। कई जगह बाजार बंद कराए गए, महिलाओं ने सड़क पर बैठकर विरोध जताया और करीब आठ किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान “आशुतोष तिवारी वापस जाओ” के नारे भी लगाए गए। भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह सहित कई पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आई हैं।
कांग्रेस ने अभी नहीं खोले पत्ते
दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। हालांकि पूर्व विधायक अवधेश नायक का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वे पहले भाजपा में थे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्हें पहले टिकट दिया गया था, लेकिन बाद में टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को उम्मीदवार बनाया गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल
दतिया में भाजपा के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नरोत्तम मिश्रा की आगे की राजनीतिक भूमिका क्या होगी। क्या पार्टी उन्हें संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी, क्या वे पार्टी के फैसले को स्वीकार करेंगे या आगे कोई नया राजनीतिक कदम उठाएंगे। फिलहाल दतिया उपचुनाव से पहले भाजपा के भीतर मचा यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा चर्चा का विषय बन गया है।




