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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कारगिल विजय दिवस, जल संरक्षण, कॉमनवेल्थ गेम्स, लोकल प्रोडक्ट्स, महिला उद्यमिता, पारंपरिक हस्तशिल्प और शिक्षा में नवाचार जैसे कई अहम विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कारगिल के वीरों को नमन, स्वदेशी रक्षा शक्ति का किया जिक्र
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश को विजय दिलाई।
पीएम ने बताया कि दिल्ली से द्रास तक शौर्य यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का उल्लेख करते हुए INS महेंद्रगिरी के नौसेना में शामिल होने और पिनाका मिसाइल के सफल परीक्षण का भी जिक्र किया।

‘पानी की हर बूंद भविष्य की पूंजी’
प्रधानमंत्री ने ‘कैच द रेन’ अभियान का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां बारिश की बूंद गिरे, वहीं उसे सहेजने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत मध्य प्रदेश में 4 हजार तालाब बनाए गए हैं, जबकि आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने भी जल संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
“आज बचाई गई पानी की हर बूंद भविष्य की पूंजी है।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
कॉमनवेल्थ गेम्स और पीवी सिंधु की उपलब्धि पर गर्व
प्रधानमंत्री ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भाग ले रहे भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और देशवासियों से उनका उत्साह बढ़ाने की अपील की।
उन्होंने बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु को जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर बधाई दी। साथ ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टेस्ट जीत का भी उल्लेख किया।
संस्कृत पढ़ाने के अनोखे तरीके की सराहना
पीएम मोदी ने केरल के एर्नाकुलम की एक शिक्षिका की प्रशंसा की, जो फुटबॉल के नियमों और मैचों के जरिए बच्चों को संस्कृत पढ़ा रही हैं। उन्होंने इसे शिक्षा में नवाचार का बेहतरीन उदाहरण बताया।

लोकल प्रोडक्ट्स और पारंपरिक हुनर को मिल रही नई पहचान
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ओलंपियाड और हैकाथॉन जैसी प्रतियोगिताओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कश्मीर की पारंपरिक ‘वागु’ चटाई का उल्लेख करते हुए बताया कि इसे दलदली घास से हाथों से तैयार किया जाता है और एक चटाई बनाने में लगभग चार दिन लगते हैं। उन्होंने इस कला को पुनर्जीवित करने वाले गुलाम हुसैन के प्रयासों की सराहना की।
बिजनौर की हर्बल चाय बनी पहचान
प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव की महिलाओं द्वारा तैयार की गई हर्बल चाय का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि गिलोय और इलायची से तैयार इस चाय को देश-विदेश में पसंद किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह पहल केवल ₹1 लाख की लागत से शुरू हुई थी और आज स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और पहचान का माध्यम बन चुकी है।

मन की बात: प्रमुख बातें
- 🇮🇳 कारगिल विजय दिवस पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि।
- 💧 ‘कैच द रेन’ अभियान के जरिए जल संरक्षण का संदेश।
- 🏅 कॉमनवेल्थ गेम्स और पीवी सिंधु की उपलब्धि पर बधाई।
- 📚 फुटबॉल के जरिए संस्कृत पढ़ाने वाली शिक्षिका की सराहना।
- 🧶 कश्मीर की पारंपरिक वागु चटाई और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा।
- 🍵 बिजनौर की महिलाओं की हर्बल चाय को सफलता की मिसाल बताया।
- 🇮🇳 लोकल उत्पादों को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।




