1 महीने पहले सजी थी शहनाई, आज तिरंगे में लौटा वीर सपूत: मेजर हमजा आरिफ को इंदौर ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई

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drnewsindia.com

इंदौर | एक तरफ जहां महज एक महीने पहले खुशियों की शहनाइयां गूंजी थीं, वहीं रविवार को मातम और देशप्रेम का जज्बा एक साथ नजर आया। भारतीय सेना के 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर इंदौर स्थित उनके घर पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई और हर दिल गर्व से भर उठा।

पूरे सैन्य सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

💔 सबसे भावुक पल: जब पत्नी ज्योति को सौंपा गया तिरंगा

अंतिम संस्कार से पहले गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान जब सेना के अधिकारियों ने तिरंगा उनकी नवविवाहिता पत्नी ज्योति अरोरा को सौंपा, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ गया।

“कांपते हाथों से तिरंगे को सीने से लगाकर ज्योति ने अपने पति को अंतिम नमन किया—यह दृश्य देखकर वहां उपस्थित जनसैलाब अपनी सिसकियां रोक न सका।”

🚨 कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

  • घटना का स्थान: जैसलमेर (राजस्थान) का थईयात सैन्य क्षेत्र
  • समय: गुरुवार देर रात
  • वजह: ड्यूटी से लौटते समय सेना की SUV के सामने अचानक ऊंट आ जाने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया।
  • असर: इस हादसे में मेजर हमजा आरिफ ने देश के लिए अपनी जान गंवा दी, जबकि उनके साथ सवार दो अन्य लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए।

🌹 देशभक्ति के नारों से गूंज उठा इंदौर

मेजर हमजा की अंतिम यात्रा सैफी नगर से शुरू होकर राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची।

  • रास्ते भर इंदौरवासियों ने अपने लाडले शहीद पर पुष्पवर्षा की।
  • हवा में ‘भारत माता की जय’ और ‘मेजर हमजा आरिफ अमर रहें’ के नारे गूंजते रहे।
  • कब्रिस्तान में पूर्ण सैन्य सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

🎖️ 9 साल की अनवरत देशसेवा

मेजर हमजा आरिफ पिछले 9 वर्षों से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। मात्र एक महीने पहले ही वे विवाह सूत्र में बंधे थे। उनकी शहादत ने इंदौर ही नहीं, पूरे देश को एक गहरा शोक और साथ ही कभी न मिटने वाला गर्व दिया है।

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