drnewsindia / इंदौर ब्यूरो | नई दिल्ली/इंदौर
इंदौर की सड़कों पर यातायात व्यवस्था संभालने के साथ-साथ इंदौर पुलिस का एक बेहद संवेदनशील और मानवीय चेहरा सामने आया है। परदेशीपुरा क्षेत्र के कलश चौराहे पर हुए एक सड़क हादसे के दौरान यातायात पुलिस की महिला आरक्षक अरुणा ठाकरे ने त्वरित तत्परता दिखाते हुए एक घायल व्यक्ति की जान बचाई।
बिना पल गंवाए फर्स्ट एड किट से दिया प्राथमिक उपचार
मिली जानकारी के अनुसार, महिला आरक्षक अरुणा ठाकरे कलश चौराहा क्षेत्र से गुजर रही थीं, तभी उनकी नज़र सड़क पर लहू-लुहान और दर्द से तड़पते हुए एक व्यक्ति पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रोकी और बिना समय गंवाए घायल के पास पहुंचीं।
- तत्काल एक्शन: आरक्षक अरुणा ठाकरे ने अपने वाहन में मौजूद ‘फर्स्ट एड किट’ निकाली और मौके पर ही घायल का प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया।
- त्वरित सहायता: प्राथमिक इलाज के बाद उन्होंने घायल को सुरक्षित स्थान और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई।
समय पर मिली इस मदद से घायल को काफी राहत मिली। मौके पर मौजूद आम नागरिकों ने भी महिला आरक्षक की इस तत्परता और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की।
“वर्दी केवल कानून-व्यवस्था संभालने के लिए नहीं, बल्कि मुसीबत में फंसे हर नागरिक की सुरक्षा और सेवा के लिए है।”
— इंदौर पुलिस का सामाजिक दायित्व

जब इंदौर पुलिस के जवानों ने सीपीआर देकर बचाई थी छात्र की जान
यह पहला मौका नहीं है जब इंदौर पुलिस का मानवीय पक्ष सामने आया हो। हाल ही में एक अन्य घटना में पुलिस जवानों की मुस्तैदी से एक छात्र की जान बची थी:
- घटना: घर लौट रहे दो छात्रों में से पीछे बैठा छात्र चलती बाइक से गिरकर बेहोश हो गया था।
- पुलिस की तत्परता: राऊ के प्रधान आरक्षक बलराम चौहान तथा थाना राजेंद्र नगर के आरक्षक राहुल बोर्डिया एवं विवेक प्रजापति ने घायल छात्र को तुरंत CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटैशन) दिया।
- परिणाम: समय पर दिए गए सीपीआर से छात्र की सांसें लौट आईं और उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाकर जान बचाई गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स्थान: कलश चौराहा, परदेशीपुरा क्षेत्र, इंदौर।
- नायक: महिला आरक्षक अरुणा ठाकरे (यातायात पुलिस)।
- संदेश: कानून व्यवस्था के साथ-साथ मानवीयता की ज़िम्मेदारी भी पुलिस का अहम हिस्सा है।




