drnewsindia.com / भोपाल/सीहोर। मध्य प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की सड़कों और विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह जिले सीहोर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इछावर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत कल्याणपुरा धाकड़ के अंतर्गत आने वाले ग्राम रामपुरा में विकास के दावे कागजों तक ही सीमित हैं। यहां पोर्टल पर तो लाखों रुपए की सड़कें ‘पूर्ण’ दर्ज हैं और राशि भी आहरित कर ली गई है, लेकिन धरातल पर ग्रामीण आज भी घुटने तक कीचड़ और पानी से गुजरने को मजबूर हैं।
💻 सरकारी पोर्टलों पर सड़कें ‘कम्प्लीट’, मौके पर गायब
ग्रामीणों और शिक्षित युवाओं ने ई-ग्राम स्वराज (e-Gram Swaraj) और पंचायत दर्पण (Panchayat Darpan) पोर्टल के आंकड़ों के हवाले से बताया कि कागजों में कई निर्माण कार्य पूरे दिखाकर राशि निकाल ली गई है:
- मोहन पर्वत के मकान से श्मशान घाट तक: (स्वीकृत राशि: ₹8 लाख, आदेश क्र./602, दिनांक 14/03/2017) – निर्माण अधूरा/नगण्य।
- मोहन पर्वत के मकान से देवकरण मालवीय तक: (15वां वित्त आयोग, एक्टिविटी कोड: 45851478, स्वीकृत राशि: ₹1 लाख)।
- अन्य संदेहास्पद कार्य: पुलिया से घिरनी वाली कुंडी (कोड: 100022304), प्रेम नारायण टेलर के मकान से चौकीदार के मकान तक (वर्क ID: 101317657), और अमरपुरी के मकान से बिशनखेड़ी काकड़ तक ग्रेवल सड़क (कोड: 45852783)।
फर्जीवाड़े का आरोप: ग्रामीणों का दावा है कि एक ही सड़क को अलग-अलग नामों से 2 से 3 बार दर्ज कर फर्जी भुगतान निकाला गया। इतना ही नहीं, भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के लिए पोर्टल पर किसी दूसरी जगह की तस्वीरें अपलोड कर सरकारी फंड का गबन किया गया।

🌊 श्मशान घाट तक की राह बदहाल, कमर तक पानी से निकलती है शव यात्रा
गांव की मुख्य सड़क जो श्मशान घाट और प्रसिद्ध बाबा रामपीर / बाबा रामदेव जी के ‘दिव्य दरबार’ की ओर जाती है, बारिश में नाले में तब्दील हो जाती है।
- अंतिम संस्कार में भारी आफत: बारिश के दिनों में यदि गांव में किसी का निधन हो जाए, तो ग्रामीणों को शव यात्रा कमर तक भरे पानी और कीचड़ के बीच से निकालकर श्मशान घाट ले जानी पड़ती है।
- नियमों की उड़ीं धज्जियां: राज्य सरकार और पंचायत विकास विभाग के स्पष्ट निर्देश हैं कि 2026 तक सभी श्मशान घाटों को मुख्य मार्ग से सी.सी. रोड द्वारा जोड़ा जाए, लेकिन रामपुरा में इन आदेशों का कोई असर नहीं दिख रहा।
📄 2022 से लगातार शिकायतें, लेकिन जांच ‘सिफर’
ग्रामीणों के अनुसार, वे वर्ष 2022 से सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और जिला प्रशासन को लगातार आवेदन दे रहे हैं।
- आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, पंचायत विभाजन के समय भी ₹12 लाख की राशि पंचायत खाते में उपलब्ध थी, फिर भी सड़क नहीं बनी।
- इसके बाद 15वें वित्त आयोग से भी बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन निर्माण जमीनी स्तर पर शून्य रहा।
❓ प्रशासनिक व्यवस्था पर खड़े होते 4 बड़े सवाल
- जब धरातल पर सी.सी. रोड बनी ही नहीं, तो ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर इसे ‘पूर्ण’ (Completed) किसने दर्ज किया?
- किन जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाए बिना कागजी सड़कों का ‘भौतिक सत्यापन’ (MB Sign) कर भुगतान पास किया?
- फर्जी फोटो अपलोड कर राशि आहरित करने वालों पर धोखाधड़ी (FIR) का मामला दर्ज क्यों नहीं हुआ?
- 4 से 5 साल से लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन ने अब तक निष्पक्ष तकनीकी जांच क्यों नहीं कराई?
ग्रामीणों की मांग: ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री और शासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र राज्य स्तरीय तकनीकी टीम से जांच कराई जाए और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के रिकॉर्ड का धरातल पर निष्पक्ष वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) कराया जाए, ताकि इस कथित सड़क घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।




