सीहोर में जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस के सामने महिला ने उठाया दराता, ट्रैक्टर पर चढ़कर सरकारी आदेश मानने से इनकार

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सीहोर। सीहोर जिले के रोला गांव में सोमवार शाम जमीन विवाद को लेकर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब विवाद सुलझाने पहुंची मंडी थाना पुलिस के सामने एक महिला दराता लेकर खड़ी हो गई। वहीं, दूसरी महिला ट्रैक्टर पर चढ़कर सरकारी आदेश मानने से इनकार करती नजर आई। खेत में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस दौरान किसी तरह की हिंसा होने की सूचना नहीं है। पुलिस की मौजूदगी में विवाद को शांत कराने का प्रयास किया गया।

तहसीलदार कोर्ट के आदेश का हवाला

खेत मालिक भगवत मेवाड़ा के अनुसार, उन्होंने विवादित जमीन वर्ष 2019 में राजेश, नारायण सिंह और लालचंद से खरीदी थी। उनका कहना है कि जमीन की जुताई को लेकर मामला तहसीलदार न्यायालय तक पहुंचा था। भगवत मेवाड़ा के मुताबिक, तहसीलदार कोर्ट की ओर से खेत में जुताई करने का आदेश दिया गया था। इसी आदेश के आधार पर वे ट्रैक्टर लेकर खेत में जुताई कराने पहुंचे थे।

भगवत मेवाड़ा का आरोप है कि जब वह और ट्रैक्टर चालक बंसीलाल खेत में पहुंचे तो कुछ लोगों ने उनका विरोध किया। इसी दौरान उन पर डंडों और पत्थरों से हमला किए जाने की बात सामने आई। घटना के बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की।

पुलिस के सामने महिला का विरोध

मामले को सुलझाने के लिए मंडी थाना पुलिस जब खेत पर पहुंची तो वहां पहले से तनाव का माहौल था। इसी दौरान एक महिला हाथ में दराता लेकर पुलिस के सामने खड़ी हो गई। दराता कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाला उपकरण है, लेकिन विवाद की स्थिति में महिला का इसे हाथ में लेकर खड़ा होना मौके पर मौजूद लोगों के लिए चिंता का कारण बना।

दूसरी ओर, एक महिला ट्रैक्टर पर चढ़ गई और उसने सरकारी आदेश के अनुसार खेत में जुताई करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इस दौरान खेत में काफी देर तक बहस और हंगामा चलता रहा। पुलिस ने मौके पर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस घटनाक्रम में किसी के घायल होने या हिंसा होने की पुष्टि नहीं हुई है।

घटना का वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसमें खेत में मौजूद लोगों के बीच विवाद और महिलाओं के विरोध का दृश्य दिखाई देने की जानकारी है। हालांकि, किसी वीडियो की परिस्थितियों और उसमें दिखाई देने वाले घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच के आधार पर ही की जा सकती है।

पुलिस और प्रशासन के सामने चुनौती

घटना के बाद सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों के बीच तनाव को बढ़ने से रोकना है। खेत में जुताई को लेकर विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब पुलिस की मौजूदगी में भी विरोध जारी रहा। ऐसे मामलों में प्रशासन को एक ओर संबंधित न्यायालय या राजस्व अधिकारी के आदेश की स्थिति देखनी होती है, वहीं दूसरी ओर मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी रहती है।

पुलिस के सामने शिकायत में लगाए गए मारपीट के आरोपों की जांच करना भी महत्वपूर्ण होगा। यदि डंडों और पत्थरों से हमला किए जाने की शिकायत की गई है तो पुलिस संबंधित पक्षों के बयान, मौके की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है।

वहीं, जमीन खरीदने के संबंध में भगवत मेवाड़ा द्वारा वर्ष 2019 के दस्तावेजों का हवाला दिया गया है। इन दस्तावेजों और तहसीलदार कोर्ट के आदेश की वास्तविक स्थिति भी मामले की जांच में महत्वपूर्ण होगी। दूसरी ओर, जिस पक्ष ने खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने की बात कही है, उसका पक्ष भी जांच में दर्ज किया जाना आवश्यक है।

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