इंदौर में साइबर ठगी का नया पैंतरा: दोस्त की मां के एक्सीडेंट और अस्पताल का झांसा देकर सप्लायर से ₹1.5 लाख ठगे; पुलिस जांच में जुटी

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drnewsindia.com / इंदौर (परदेशीपुरा)। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जालसाजों ने एक बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर को दोस्त बनकर कॉल किया और उसकी मां को अस्पताल में भर्ती बताकर इलाज के नाम पर ₹1.5 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित की शिकायत पर परदेशीपुरा पुलिस ने मंगलवार को धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

📞 दोस्त की मां को हार्ट अटैक का झांसा, फिर फर्जी डॉक्टर ने मांगे पैसे

पीड़ित संजय (बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर) ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 15 अगस्त की शाम उनके पास एक अनजान नंबर से कॉल आया था:

  • दोस्त बनकर कॉल: फोन करने वाले ने खुद को संजय का करीबी दोस्त ‘धर्मेंद्र जाट’ बताया और कहा कि वह सीएचएल अपोलो अस्पताल (CHL Hospital) में है, जहां उसकी मां को हार्ट अटैक आने के कारण भर्ती कराया गया है। जालसाज ने बातचीत के दौरान एक अन्य व्यक्ति से भी बात कराई। हड़बड़ाहट और घबराहट में संजय आवाज नहीं पहचान पाए।
  • डॉक्टर बनकर मांगे रुपये: इसके तुरंत बाद दूसरे नंबर से खुद को ‘डॉक्टर उमंग सिंह’ बताने वाले व्यक्ति का फोन आया। उसने इमरजेंसी इलाज के नाम पर तुरंत ₹1.5 लाख रुपये जमा कराने को कहा।

💸 किस्तों में ऐंठे ₹1.5 लाख: पहले ₹15 हजार, फिर 96 हजार और 40 हजार का ट्रांजैक्शन

संजय ने जब पूरे पैसे न होने की बात कही, तो ठगों ने जितने पैसे तुरंत उपलब्ध हैं, उतने ही भेजने का दबाव बनाया।

  • ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: पीड़ित संजय ने घबराहट में सबसे पहले ₹15,000 PhonePe के जरिए ट्रांसफर किए।
  • इमरजेंसी का दबाव: इसके बाद आरोपियों ने मरीज की हालत गंभीर बताकर लगातार कॉल किए, जिसके बाद संजय ने ₹96,000 और फिर ₹40,000 की रकम अलग-अलग किस्तों में भेज दी।

🔍 असली दोस्त को फोन मिलाया तो खुला राज; केस दर्ज

लगातार हो रही पैसों की मांग से जब संजय को शक हुआ, तो उन्होंने अपने दोस्त धर्मेंद्र के वास्तविक मोबाइल नंबर पर कॉल किया। धर्मेंद्र ने बताया कि उसकी मां बिल्कुल ठीक हैं और वह अपने घर पर है, किसी अस्पताल में नहीं।

ठगी का अहसास होते ही संजय ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल, परदेशीपुरा पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और जिन बैंक खातों व मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल हुआ है, उनकी कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) व बैंक खातों की जानकारी खंगाली जा रही है।

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