शमशाबाद के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में 28वीं राष्ट्रीय युवा संसद की संकुल स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित

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विदिशा/शमशाबाद। पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय शमशाबाद, जिला विदिशा में 28वीं राष्ट्रीय युवा संसद की संकुल स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संसदीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका के प्रति जागरूक करना है। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को चर्चा, संवाद, विचार अभिव्यक्ति और संसदीय प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला।

विभिन्न जवाहर नवोदय विद्यालयों ने भेजे वीडियो

प्राचार्य के अनुसार प्रतियोगिता के लिए मध्य प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालयों से वीडियो प्राप्त हुए हैं। इनमें पीएम श्री जेएनवी बेमेतरा, पीएम श्री जेएनवी बस्तर, पीएम श्री जेएनवी आगर मालवा, पीएम श्री जेएनवी भद्रक, पीएम श्री जेएनवी बौद्ध, पीएम श्री जेएनवी धार, पीएम श्री जेएनवी ढेंकनाल, पीएम श्री जेएनवी जाजपुर, पीएम श्री जेएनवी कटनी, पीएम श्री जेएनवी कोरबा, पीएमसी जीएनबी नारायणपुर, पीएम श्री जेएनवी नीमच, पीएम श्री जेएनवी रतलाम-2 और पीएमसी उज्जैन-2 सहित विभिन्न विद्यालय शामिल हैं।

इन विद्यालयों की ओर से भेजे गए वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों की भागीदारी सामने आई। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालयों को इस प्रकार के आयोजन से जोड़ने का उद्देश्य विद्यार्थियों को एक साझा शैक्षणिक और लोकतांत्रिक मंच उपलब्ध कराना है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को संसदीय गतिविधियों की जानकारी हासिल करने और अपने विचार व्यवस्थित ढंग से रखने का अवसर मिलता है।

युवाओं को लोकतंत्र की प्रक्रिया समझाने पर जोर

राष्ट्रीय युवा संसद जैसे कार्यक्रमों का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना से परिचित कराना है। विद्यालय स्तर पर आयोजित युवा संसद विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देती है कि किसी विषय पर चर्चा किस प्रकार की जाती है, अलग-अलग विचारों को किस तरह सुना जाता है और संवाद के माध्यम से विषयों पर विचार-विमर्श कैसे किया जाता है।

ऐसे कार्यक्रमों में विद्यार्थी संसद की कार्यवाही की शैली को समझने का प्रयास करते हैं। इससे उनमें सार्वजनिक विषयों पर जानकारी जुटाने, अपनी बात रखने और दूसरे पक्ष के विचार सुनने जैसी क्षमताओं का विकास करने में मदद मिलती है। विद्यालय स्तर पर होने वाली यह गतिविधि विद्यार्थियों की शैक्षणिक शिक्षा के साथ उनके व्यावहारिक ज्ञान को भी बढ़ाने का माध्यम बनती है।

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