शाजापुर। शाजापुर जिले के मुल्लाखेड़ी गांव स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है। स्कूल में पदस्थ शिक्षिका जासमीन बी की जगह उनके पति सादिक सिद्दीकी द्वारा बच्चों को पढ़ाए जाने की शिकायत और रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। बताया गया है कि यह व्यवस्था कथित तौर पर लंबे समय से चल रही थी। मामले की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने स्कूल की व्यवस्थाओं और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका को लेकर संज्ञान लिया है।
मीडिया टीम के पहुंचने पर सामने आया मामला
मुल्लाखेड़ी के शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कथित अनियमितता का मामला उस समय सामने आया जब मीडिया टीम स्कूल पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान सादिक सिद्दीकी विद्यालय में मौजूद मिले। उनसे शिक्षिका की जगह स्कूल में बच्चों को पढ़ाने को लेकर सवाल किए गए। इसके बाद विद्यालय में शिक्षक की भूमिका और कक्षाओं के संचालन को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
बताया गया है कि स्कूल की संस्था प्रधान फरकुंदा बी को भी इस व्यवस्था की जानकारी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कैमरे पर शिक्षिका की जगह उनके पति द्वारा बच्चों को पढ़ाए जाने की व्यवस्था की जानकारी होने की बात कही। इस जानकारी के सामने आने के बाद स्कूल की निगरानी, शिक्षक उपस्थिति और विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं।
विद्यालय में करीब 43 बच्चों के दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई मुख्य रूप से स्कूल में तैनात शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और कक्षा संचालन पर निर्भर रहती है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक की जगह कोई अन्य व्यक्ति लंबे समय तक कक्षाएं संचालित करता है तो इससे बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालय की जवाबदेही से जुड़े प्रश्न पैदा होते हैं।
कलेक्टर के निरीक्षण में भी मिलीं गड़बड़ियां
मामले की जानकारी सामने आने के बाद कलेक्टर द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। निरीक्षण के दौरान स्कूल में शिक्षा व्यवस्था से संबंधित अन्य गड़बड़ियां भी सामने आने की जानकारी है। इसके बाद संबंधित शिक्षिका और प्रधान अध्यापिका को नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किया जाना इस मामले में आगे की जांच और संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। नोटिस के माध्यम से संबंधित कर्मचारियों से विद्यालय में सामने आई व्यवस्थाओं और उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा जा सकता है। इसके बाद उपलब्ध जवाब और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।
हालांकि, फिलहाल सामने आई शिकायतों और आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति का निर्धारण विभागीय जांच, उपस्थिति रिकॉर्ड, स्कूल के दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के आधार पर होगा। इसलिए प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लंबे समय तक स्कूल में वास्तव में क्या व्यवस्था रही और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
शिक्षिका जासमीन बी और प्रधान अध्यापिका फरकुंदा बी को नोटिस जारी होने के बाद अब उनके जवाब और प्रशासनिक जांच पर नजर रहेगी। जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि संबंधित कर्मचारियों की ओर से कोई अलग तथ्य या स्पष्टीकरण सामने आता है तो प्रशासन उसे भी जांच प्रक्रिया में शामिल करेगा।
फिलहाल मुल्लाखेड़ी स्कूल का यह मामला सरकारी विद्यालयों में शिक्षक उपस्थिति, कक्षा संचालन और प्रशासनिक निगरानी की व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। कलेक्टर के निरीक्षण के बाद नोटिस जारी होने से यह संकेत मिलता है कि जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। अब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि स्कूल में सामने आई अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति क्या थी और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।




