लहसुन की खेती से अच्छी पैदावार के लिए अपनाएं ये तरीके, मिट्टी से लेकर सिंचाई तक इन बातों का रखें ध्यान

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नई दिल्ली। भारत में लहसुन का इस्तेमाल रोजमर्रा के भोजन से लेकर कई तरह के खाद्य उत्पादों में किया जाता है। सब्जियों, दालों, चटनी और मसालेदार व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने के लिए लहसुन का उपयोग आम है। घरेलू खपत के अलावा बाजार में भी इसकी मांग बनी रहती है और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में लहसुन को महत्वपूर्ण मसाला फसलों में गिना जाता है।

लहसुन के लिए कैसी मिट्टी बेहतर?

लहसुन की खेती के लिए भुरभुरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है। ऐसी मिट्टी में लहसुन की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और जमीन के अंदर बनने वाली गांठों के विकास के लिए भी अनुकूल परिस्थितियां रहती हैं।

खेत की मिट्टी यदि बहुत ज्यादा कठोर हो तो जड़ों और गांठों के विकास में परेशानी आ सकती है। इसलिए बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा करना जरूरी होता है। खेत में मौजूद बड़े ढेलों को तोड़कर जमीन को समतल और खेती के लिए तैयार किया जा सकता है।

खेत में पानी रुकना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?

लहसुन की खेती में अच्छी जल निकासी का विशेष महत्व है। ऐसे खेत जहां बारिश या सिंचाई के बाद पानी लंबे समय तक जमा रहता है, वहां फसल को नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। लगातार अधिक नमी रहने से लहसुन की गांठों का विकास प्रभावित हो सकता है।

इसके अलावा खेत में अधिक समय तक नमी बनी रहने से फंगल रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए खेत का चुनाव करते समय यह देखना चाहिए कि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। यदि खेत में जल निकासी की समस्या है तो जरूरत के अनुसार नालियों की व्यवस्था की जा सकती है।

लहसुन की खेती में बेहतर उत्पादन के लिए शुरुआत खेत के सही चुनाव और तैयारी से होती है। भुरभुरी और उपजाऊ दोमट मिट्टी, अच्छी जल निकासी और लगभग 6 से 7.5 के बीच उपयुक्त pH फसल के लिए अनुकूल माना जाता है। खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहने से बचाना चाहिए, क्योंकि अधिक नमी गांठों के विकास को प्रभावित कर सकती है और फंगल रोगों का जोखिम बढ़ा सकती है।

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