लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच रणनीति, संगठन और संभावित गठबंधन को लेकर तैयारियां दिखाई देने लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना को लेकर अपना रुख सामने रखा है। ओवैसी ने कहा है कि यदि उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने से रोकना है, तो उनकी पार्टी समान विचारधारा वाले दलों के साथ काम करने के लिए तैयार है।
ओवैसी ने क्या कहा?
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में ओवैसी ने विपक्षी दलों को साथ आने का संदेश दिया। उनके अनुसार कोई भी विपक्षी पार्टी अकेले भाजपा का मुकाबला नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि यदि कोई दल भाजपा को सरकार बनाते हुए नहीं देखना चाहता है, तो वह AIMIM से बातचीत कर सकता है और उनकी पार्टी साथ काम करने के लिए तैयार है।
ओवैसी के बयान का मुख्य जोर विपक्षी दलों की एकजुटता और राजनीतिक साझेदारी पर रहा। AIMIM प्रमुख का कहना है कि यदि सभी दलों का लक्ष्य भाजपा को सत्ता में आने से रोकना है, तो उन्हें एक-दूसरे के साथ बातचीत करनी चाहिए। हालांकि उनके बयान में गठबंधन की कोई निश्चित सीट संख्या, सीट बंटवारे का फॉर्मूला या किसी खास दल के साथ अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की गई है।
AIMIM की गठबंधन को लेकर क्या मांग है?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM लंबे समय से मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को लेकर जोर देती रही है। हाल के महीनों में ओवैसी ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई हैं। उन्होंने कई जनसभाओं में समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं की आलोचना भी की है, लेकिन साथ ही विपक्षी दलों के साथ गठबंधन का रास्ता खुला रखा है।
The Indian Express की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ओवैसी ने विपक्षी दलों के साथ संभावित गठबंधन की बात करते हुए AIMIM के लिए ‘हिस्सेदारी’ और राजनीतिक साझेदारी पर जोर दिया था। रिपोर्ट के अनुसार AIMIM का तर्क है कि गठबंधन की स्थिति में पार्टी को केवल किसी बड़े दल के साथ औपचारिक रूप से जुड़ने के बजाय चुनावी और राजनीतिक निर्णयों में उचित भागीदारी मिलनी चाहिए।
फिलहाल ओवैसी का बयान गठबंधन की संभावना का संकेत जरूर देता है, लेकिन इसे अंतिम चुनावी समझौता नहीं माना जा सकता। आने वाले महीनों में दलों की बातचीत, सीटों पर दावेदारी, उम्मीदवारों की घोषणा और स्थानीय स्तर के समीकरण यह तय करेंगे कि 2027 के विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल किस तरह मैदान में उतरते हैं। अंतिम फैसला चुनाव के दौरान मतदाताओं के हाथ में होगा।




