जापान। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए छठा दिन शानदार शुरुआत लेकर आया। शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट में भारत की सुरुचि सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने प्रतियोगिता में अपना दूसरा गोल्ड मेडल हासिल कर लिया। इससे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने फाइनल मुकाबले में श्रीलंका को हराकर भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीता था।
शुरुआत से ही भारत ने बनाई बढ़त
10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही अच्छी लय दिखाई। सुरुचि सिंह और कमलजीत के प्रदर्शन में निरंतरता देखने को मिली और दोनों ने मुकाबले के शुरुआती चरण में बढ़त बना ली। इसके बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन में गिरावट नहीं आने दी और लगातार अच्छे स्कोर हासिल करते रहे।
फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में शुरुआती बढ़त हासिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है। भारतीय जोड़ी ने इसका फायदा उठाते हुए अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी। जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, दक्षिण कोरिया की जोड़ी ने अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय निशानेबाज अपनी बढ़त बचाने में सफल रहे।
अंतिम चरण में मुकाबला थोड़ा दबाव वाला जरूर हुआ, लेकिन सुरुचि और कमलजीत ने धैर्य बनाए रखा। आखिरकार भारतीय जोड़ी ने 6.6 अंकों के अंतर से स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
भारत के खाते में आया दूसरा गोल्ड
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए यह दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर गोल्ड मेडल जीता था। इस तरह शूटिंग में मिली जीत के बाद भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या दो हो गई है।
महिला क्रिकेट में भारत की जीत के बाद शूटिंग में भी गोल्ड मिलने से भारतीय दल के लिए प्रतियोगिता का छठा दिन महत्वपूर्ण बन गया। शूटिंग लंबे समय से एशियन गेम्स में भारत के लिए पदक दिलाने वाले प्रमुख खेलों में शामिल रही है। ऐसे में सुरुचि सिंह और कमलजीत की यह जीत भारतीय शूटिंग दल के लिए भी खास उपलब्धि है।
एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए प्रतियोगिता अभी जारी है और अलग-अलग खेलों में भारतीय खिलाड़ी पदक की दावेदारी पेश कर रहे हैं। शूटिंग में सुरुचि सिंह और कमलजीत का स्वर्ण पदक भारतीय अभियान में एक और उपलब्धि जोड़ता है। छठे दिन मिली यह सफलता भारत के लिए खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि इससे पदक तालिका में देश के गोल्ड मेडल की संख्या दो हो गई।




