जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश किए गए पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने संबंधी प्रस्ताव पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। प्रस्ताव में वर्ष 2000 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा पारित स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ दिए जाने पर भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने कड़ा विरोध जताया। देखते ही देखते भाजपा सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए विधानसभा की कार्यवाही करीब आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव के जिक्र पर BJP का विरोध
विधानसभा में विवाद तब बढ़ा जब मौजूदा स्टेटहुड प्रस्ताव में 26 जून 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का संदर्भ सामने आया। भाजपा सदस्यों ने सवाल उठाया कि करीब 26 साल पुराने प्रस्ताव को वर्तमान समय में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग से क्यों जोड़ा जा रहा है।
भाजपा विधायकों का तर्क था कि वर्ष 2000 में जम्मू-कश्मीर एक पूर्ण राज्य था, जबकि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश है। ऐसे में उस समय की राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियों में पारित प्रस्ताव को मौजूदा प्रस्ताव का हिस्सा बनाए जाने पर स्पष्टीकरण की जरूरत है। भाजपा सदस्यों ने सदन में इस संदर्भ का विरोध किया और कहा कि वे स्वायत्तता के मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं देंगे।
क्या था साल 2000 का स्वायत्तता प्रस्ताव?
वर्ष 2000 में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने स्वायत्तता से संबंधित प्रस्ताव पारित किया था। उपलब्ध ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार 26 जून 2000 को विधानसभा ने State Autonomy Committee की रिपोर्ट पर आधारित प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के लिए पहले की संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप अधिक स्वायत्तता की मांग करना था।
यह प्रस्ताव उस समय भी राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना था। केंद्र सरकार ने उस समय प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था। इसलिए 2000 के प्रस्ताव का मौजूदा विधानसभा की कार्यवाही में संदर्भ आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीति में स्वायत्तता का मुद्दा पुराना है और पार्टी ने 2024 के विधानसभा चुनाव के घोषणापत्र में भी 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को लागू कराने की प्रतिबद्धता का उल्लेख किया था। इसलिए मौजूदा प्रस्ताव में पुराने प्रस्ताव का संदर्भ पार्टी के व्यापक राजनीतिक रुख से भी जुड़ा हुआ है।
विधानसभा में हंगामे के बाद अब इस प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और सदन की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। प्रस्ताव का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को केंद्र सरकार के सामने रखना है, जबकि 2000 और 2024 के पुराने प्रस्तावों का संदर्भ राजनीतिक बहस का अलग मुद्दा बन गया है।
फिलहाल जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दो प्रमुख राजनीतिक रुख स्पष्ट रूप से सामने आए हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस पुराने स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ को अपने राजनीतिक रुख से जोड़कर देख रही है, जबकि भाजपा मौजूदा स्टेटहुड प्रस्ताव में इसके उल्लेख का विरोध कर रही है। इस मतभेद के कारण शुक्रवार की कार्यवाही बाधित हुई और सदन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।




