भोपाल। खेती में आधुनिक तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। जुताई, बुवाई, मिट्टी तैयार करने और दूसरी कृषि गतिविधियों में मशीनों के इस्तेमाल से किसानों को समय और श्रम बचाने में मदद मिलती है। ट्रैक्टर, कल्टीवेटर, रोटावेटर और पावर टिलर जैसे उपकरण अब आधुनिक खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि इन मशीनों की कीमत अधिक होने के कारण छोटे और सीमांत किसानों के लिए इन्हें खरीदना हमेशा आसान नहीं होता।
कृषि उपकरण खरीदने पर कैसे मिलती है मदद?
कृषि मशीनरी पर मिलने वाला अनुदान किसानों के लिए मशीन खरीद की शुरुआती लागत कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि हर कृषि यंत्र पर एक समान सब्सिडी लागू नहीं होती। अनुदान की राशि या प्रतिशत संबंधित यंत्र, किसान की श्रेणी और लागू सरकारी नियमों के अनुसार अलग हो सकता है।
यही वजह है कि किसी भी मशीन की खरीद से पहले किसान को आधिकारिक पोर्टल पर उस कृषि यंत्र के लिए उपलब्ध अनुदान, पात्रता और अन्य शर्तों की जानकारी जरूर देखनी चाहिए। केवल ‘50 प्रतिशत तक सब्सिडी’ को सभी मशीनों के लिए निश्चित राशि मानना सही नहीं होगा।
आवेदन के लिए है ऑनलाइन प्रक्रिया
मध्य प्रदेश कृषि विभाग के ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर कृषि यंत्रों के लिए आवेदन की ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुछ चिन्हित कृषि यंत्रों के लिए आवेदन करने वाले किसान को धरोहर राशि का ऑनलाइन भुगतान करना होता है। भुगतान की पुष्टि होने के बाद ही आवेदन लॉटरी की प्रक्रिया के लिए पात्र माना जाता है।
इसका मतलब यह है कि केवल ऑनलाइन आवेदन कर देना पर्याप्त नहीं है। यदि संबंधित आवेदन के लिए निर्धारित धरोहर राशि का भुगतान समय पर सत्यापित नहीं होता, तो लॉटरी में उस आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। इसलिए आवेदन करते समय किसान को पोर्टल पर दिए गए निर्देशों को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
मध्य प्रदेश में कृषि यंत्र अनुदान की व्यवस्था का व्यापक उद्देश्य खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देना है। आधुनिक कृषि उपकरणों की मदद से खेत तैयार करने और अन्य कृषि कार्यों में दक्षता बढ़ाने की कोशिश की जाती है। सरकार की ऐसी योजनाएं किसानों के लिए मशीनरी की खरीद लागत को कम करने में सहायता कर सकती हैं।
किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे किसी भी कृषि यंत्र को खरीदने से पहले संबंधित योजना की मौजूदा शर्तों और अनुदान की वास्तविक राशि की पुष्टि करें। क्योंकि अलग-अलग कृषि यंत्रों और किसान श्रेणियों के लिए नियम अलग हो सकते हैं।




