नई दिल्ली। खेती में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है और अब ड्रोन भी कृषि क्षेत्र में उपयोगी तकनीक के रूप में तेजी से जगह बना रहे हैं। खेतों में खाद और कीटनाशकों के छिड़काव से लेकर फसल की निगरानी तक ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। खास तौर पर बड़े खेतों में कम समय में छिड़काव करने और श्रम की जरूरत कम करने के कारण किसान ड्रोन तकनीक में रुचि दिखा रहे हैं। सरकार भी कृषि मशीनीकरण और आधुनिक कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से ड्रोन खरीद और ड्रोन सेवाओं के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है।
व्यक्तिगत किसानों को भी मिल सकती है आर्थिक मदद
सरकार की व्यवस्था के अनुसार व्यक्तिगत स्तर पर ड्रोन खरीदने वाले छोटे और सीमांत किसानों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों, महिला किसानों और पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों के लिए ड्रोन की लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये प्रति ड्रोन है। वहीं अन्य किसानों के लिए 40 प्रतिशत तक सहायता, अधिकतम 4 लाख रुपये प्रति ड्रोन तक दी जा सकती है। इस तरह ड्रोन खरीदने की शुरुआती लागत को कम करने में सरकारी सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ड्रोन के जरिए खेत में तरल खाद और कीटनाशकों का छिड़काव अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकता है। विशेष रूप से बड़े क्षेत्र में पारंपरिक तरीके से छिड़काव करने में ज्यादा श्रम और समय लगता है। ड्रोन आधारित छिड़काव में खेत के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचना आसान हो सकता है। सरकार के अनुसार कृषि ड्रोन के इस्तेमाल से छिड़काव की दक्षता बढ़ाने, पानी तथा कृषि रसायनों की बचत और रासायनिक पदार्थों के सीधे संपर्क को कम करने जैसे फायदे हो सकते हैं।
महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए नमो ड्रोन दीदी योजना
कृषि में ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण महिलाओं को इससे जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसके तहत चयनित महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन उपलब्ध कराकर उन्हें किसानों को कृषि सेवाएं किराये पर देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। योजना का कुल परिव्यय 1,261 करोड़ रुपये है और इसका लक्ष्य महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन तकनीक से जोड़ना है।
नमो ड्रोन दीदी योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी वित्तीय सहायता है। चयनित महिला SHG को ड्रोन पैकेज की लागत का 80 प्रतिशत तक केंद्रीय वित्तीय सहायता, अधिकतम 8 लाख रुपये तक दी जाती है। ड्रोन खरीद की शेष राशि जुटाने के लिए SHG या उनके क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) को National Agriculture Infrastructure Financing Facility (AIF) के तहत ऋण लेने का विकल्प भी उपलब्ध है। इस ऋण पर 3 प्रतिशत की ब्याज छूट का प्रावधान बताया गया है।
फसल निगरानी में भी उपयोगी हो सकती है तकनीक
ड्रोन का उपयोग केवल छिड़काव तक सीमित नहीं है। खेतों का निरीक्षण और फसल की स्थिति पर नजर रखने में भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। बड़े खेतों में किसान ऊपर से फसल और खेत के अलग-अलग हिस्सों को देखकर स्थिति का आकलन कर सकते हैं। भविष्य में सेंसर और अन्य डिजिटल कृषि तकनीकों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल फसल प्रबंधन को और अधिक डेटा आधारित बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, ड्रोन खरीदने या सेवा लेने से पहले किसानों और संस्थाओं को संबंधित योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, स्वीकृत उपकरण, प्रशिक्षण तथा राज्य स्तर पर लागू नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। सब्सिडी की राशि भी किसान की श्रेणी और ड्रोन खरीदने वाली संस्था के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए केवल अधिकतम सब्सिडी की राशि देखकर निर्णय लेने के बजाय संबंधित कृषि विभाग या अधिकृत योजना दिशा-निर्देशों से पात्रता और वास्तविक सहायता की पुष्टि करना जरूरी है।
कुल मिलाकर, कृषि ड्रोन खेती में समय और श्रम की बचत के साथ आधुनिक कृषि सेवाओं को बढ़ावा देने का एक माध्यम बन रहे हैं। व्यक्तिगत किसानों से लेकर FPO, कस्टम हायरिंग सेंटर और महिला स्वयं सहायता समूहों तक के लिए अलग-अलग वित्तीय सहायता प्रावधान किए गए हैं। खास तौर पर नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला SHG को 8 लाख रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता मिलने का प्रावधान ग्रामीण महिलाओं को कृषि तकनीक और सेवा आधारित उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।




