रबी फसलों पर सरकार का बड़ा फैसला, गेहूं-चना समेत 6 फसलों की MSP बढ़ी; जानिए किसानों पर क्या होगा असर

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नई दिल्ली। रबी का मौसम किसानों के लिए खेती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान किसान केवल खेत तैयार कर बीज की बुवाई नहीं करता, बल्कि पूरी फसल की लागत, संभावित उत्पादन और बाजार में मिलने वाले भाव को ध्यान में रखकर फसल का चयन भी करता है। ऐसे समय में केंद्र सरकार की ओर से रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी का फैसला किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख रबी फसलों की MSP बढ़ाने को मंजूरी दी है।

रबी सीजन में MSP क्यों महत्वपूर्ण है?

MSP वह न्यूनतम समर्थन मूल्य है जिसे सरकार प्रमुख कृषि उपज के लिए घोषित करती है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए एक संदर्भ मूल्य उपलब्ध कराना और बाजार में कीमतों में अत्यधिक गिरावट की स्थिति में आय को सहारा देना है। हालांकि MSP घोषित होना और हर किसान की पूरी उपज की उसी कीमत पर खरीद होना एक ही बात नहीं है। वास्तविक खरीद सरकारी एजेंसियों, राज्य की व्यवस्थाओं और संबंधित फसल की खरीद नीति पर निर्भर करती है।

रबी फसलों की बुवाई आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के आसपास शुरू होती है और इनकी कटाई अगले वर्ष मार्च-अप्रैल के दौरान होती है। गेहूं, चना, मसूर, सरसों, जौ और कुसुम जैसी फसलें इस मौसम की प्रमुख फसलों में शामिल हैं। इसलिए MSP में बदलाव का असर किसानों के फसल चयन और खेती की आर्थिक गणना पर पड़ सकता है।

सिर्फ गेहूं और चने तक सीमित नहीं रहा फैसला

किसानों के बीच MSP की चर्चा अक्सर गेहूं और धान जैसी प्रमुख फसलों के संदर्भ में होती है। रबी सीजन में भी गेहूं को लेकर किसानों की दिलचस्पी अधिक रहती है। लेकिन इस बार सरकार के फैसले में छह फसलों को शामिल किया गया है।

इसका एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दलहन और तिलहन फसलों को भी MSP व्यवस्था में समर्थन दिया गया है। फसल विविधीकरण के संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसानों के लिए केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों की आर्थिक संभावनाओं पर विचार करना संभव होता है।

कुल मिलाकर रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों की MSP बढ़ाने का फैसला किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि नीति निर्णय है। गेहूं और चना के साथ जौ, मसूर, रेपसीड-सरसों और कुसुम को शामिल किए जाने से अनाज के साथ दलहन और तिलहन फसलों को भी मूल्य समर्थन के दायरे में महत्व मिला है। अब किसानों के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण बुवाई की तैयारी और फसल की लागत का आकलन होगा। MSP में बढ़ोतरी से मिलने वाला वास्तविक आर्थिक लाभ उत्पादन, बाजार भाव और सरकारी खरीद की स्थानीय व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

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