नई दिल्ली: मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में कथित तौर पर तय वैधानिक प्रक्रिया के बिना किए गए बदलाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। अदालत अब यह जांच करेगी कि फॉर्म 6 में जिस तरह के बदलाव किए गए, उनके लिए कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
क्या है Form 6 और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?
फॉर्म 6 सामान्य तौर पर नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चुनाव आयोग के अनुसार, जिस भारतीय नागरिक की उम्र निर्धारित पात्रता तिथि पर 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है, वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए निर्धारित फॉर्म 6 के माध्यम से आवेदन कर सकता है। आवेदन संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के Electoral Registration Officer यानी ERO के समक्ष किया जाता है। इसे ऑनलाइन भी जमा किया जा सकता है।
चुनाव आयोग के आधिकारिक फॉर्म में आवेदक का नाम, संबंधित रिश्तेदार का नाम, जन्मतिथि, पता और अन्य आवश्यक विवरण शामिल होते हैं। आवेदन की जांच के दौरान निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी आवश्यकता के अनुसार जानकारी का सत्यापन करा सकता है। किसी व्यक्ति के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने से पहले निर्धारित दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया भी लागू होती है। यदि किसी दावे पर आपत्ति आती है, तो संबंधित अधिकारी आवेदक और आपत्ति करने वाले पक्ष को सुन सकता है।
SIR से कैसे जुड़ा है विवाद?
Special Intensive Revision (SIR) मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र लोगों को शामिल करना और रिकॉर्ड को अद्यतन करना है। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर SIR-2026 के लिए अलग सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें Enumeration Form भरने और पिछले SIR की मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा शामिल है।
वर्तमान विवाद में आरोप है कि SIR से संबंधित प्रक्रिया के दौरान डिजिटल माध्यम से इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म 6 में अतिरिक्त घोषणा या जानकारी का प्रावधान जोड़ा गया। इस बदलाव को लेकर सवाल उठे कि क्या इसे वैधानिक रूप से निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू किया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बाद में इस अतिरिक्त प्रावधान को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां सामने आईं और विवादित बदलाव को वापस लेने की कार्रवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म 6 के किसी संशोधित रूप को मंजूरी नहीं दी थी। अदालत ने मामले को रिकॉर्ड की जांच से जोड़ते हुए यह जानने की दिशा में कदम बढ़ाया है कि बदलाव किसने किया और उसके पीछे प्रशासनिक तथा कानूनी प्रक्रिया क्या थी।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने अभी यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि फॉर्म 6 में किया गया बदलाव कानून का उल्लंघन था। फिलहाल न्यायालय ने संबंधित पक्षों से जवाब और रिकॉर्ड मांगकर मामले की जांच आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसलिए इस स्तर पर किसी पक्ष की जिम्मेदारी या कानूनी दोष को अंतिम रूप से तय मानना उचित नहीं होगा।





