बिलकिसगंज। चैनपुरा की बड़ली से टीलाखेड़ी वेयरहाउस तक करीब ढाई से 3 किलोमीटर लंबा मार्ग वर्षों से बदहाली का सामना कर रहा है। बारिश का मौसम आते ही इस रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे होने के कारण ग्रामीणों को सामान्य आवागमन में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी हो जाती है कि सड़क से निकलना मुश्किल हो जाता है और लोगों को खेतों के किनारे बने संकरे रास्तों का सहारा लेकर आवागमन करना पड़ता है।
बारिश में सड़क के बजाय खेतों के किनारे से आवागमन
चैनपुरा की बड़ली से टीलाखेड़ी वेयरहाउस तक का मार्ग स्थानीय ग्रामीणों के लिए महत्वपूर्ण आवागमन का रास्ता है। सामान्य मौसम में भी मार्ग की स्थिति को लेकर ग्रामीणों को परेशानी रहती है, लेकिन बारिश के दौरान समस्या गंभीर रूप ले लेती है। लगातार बारिश होने पर सड़क का कच्चा और खराब हिस्सा कीचड़ में तब्दील हो जाता है। जगह-जगह बने गड्ढों में पानी और कीचड़ जमा होने से रास्ते पर चलना कठिन हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार उन्हें मुख्य मार्ग छोड़कर खेतों के किनारे बने रास्तों से होकर निकलना पड़ता है। ये रास्ते अपेक्षाकृत संकरे हैं और बारिश के दौरान वहां से निकलना भी आसान नहीं होता। इसके बावजूद जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों के पास दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण उन्हें इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
करीब तीन किलोमीटर मार्ग, दो जिलों की सीमा में
ग्रामीणों के अनुसार चैनपुरा की बड़ली से टीलाखेड़ी वेयरहाउस तक करीब तीन किलोमीटर का यह मार्ग स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण है। इस मार्ग की एक खास स्थिति यह है कि इसका लगभग आधा हिस्सा सीहोर जिले की सीमा में आता है, जबकि बाकी हिस्सा भोपाल जिले की सीमा में बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि दो जिलों की सीमा में आने के कारण सड़क निर्माण से जुड़ा मामला लंबे समय से अटका हुआ है। लोगों के सामने मुख्य समस्या यह है कि मार्ग का एक हिस्सा एक जिले में और दूसरा हिस्सा दूसरे जिले में होने के कारण इसके निर्माण और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग और प्रशासन आपसी समन्वय के साथ इस मार्ग की समस्या का समाधान करें।
फिलहाल ग्रामीणों के सामने बारिश में बदहाल सड़क से गुजरने की मजबूरी बनी हुई है। वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की मांग एक बार फिर उठी है। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियां गुजरने के बाद भी यदि सड़क की स्थिति नहीं बदली है तो अब इस मार्ग के निर्माण के लिए ठोस पहल की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी उसी परेशानी का सामना न करना पड़े।






