रायसेन। मध्य प्रदेश के उदयपुरा स्थित शासकीय सांदीपनि विद्यालय में उस समय माहौल कुछ अलग नजर आया, जब मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान के तहत कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा स्कूल के निरीक्षण के लिए पहुंचे। आमतौर पर प्रशासनिक अधिकारियों के स्कूल निरीक्षण के दौरान अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी औपचारिक तैयारियों में व्यस्त दिखाई देते हैं, लेकिन यहां कलेक्टर ने विद्यार्थियों के बीच जाकर उनसे सीधे बातचीत को प्राथमिकता दी। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों को लेकर सवाल किए और उनकी बातों को ध्यान से सुना।
कक्षाओं में पहुंचकर विद्यार्थियों से लिया फीडबैक
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर केवल स्कूल कार्यालय तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अलग-अलग कक्षाओं में पहुंचे और विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई को लेकर सवाल किए और यह जानने की कोशिश की कि वे प्रतिदिन कितनी देर पढ़ाई करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से यह भी पूछा कि वे भविष्य में क्या बनना चाहते हैं।
बच्चों के साथ इस तरह का सीधा संवाद निरीक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। विद्यार्थियों से बातचीत के माध्यम से कलेक्टर ने उनकी पढ़ाई के अनुभव और विद्यालय में अध्यापन व्यवस्था को लेकर फीडबैक लिया। बच्चों से सीधे जानकारी लेने का उद्देश्य यह समझना भी था कि कक्षा में पढ़ाई किस तरह संचालित हो रही है और विद्यार्थियों को किन स्तरों पर मदद की आवश्यकता महसूस होती है।
शिक्षकों की उपस्थिति और पढ़ाई की स्थिति की जानकारी
कलेक्टर ने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था का मूल्यांकन करते हुए शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई की स्थिति की जानकारी भी ली। उन्होंने प्राचार्य तथा शिक्षकों से विद्यालय में संचालित कक्षाओं, विद्यार्थियों की संख्या और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और प्रभावी अध्यापन विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने शिक्षक उपस्थिति और कक्षा में पढ़ाई की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त की। इसके साथ ही पिछले वर्ष के परीक्षा परिणामों की भी समीक्षा की गई, ताकि विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों को समझा जा सके।
बच्चों के साथ बैठकर भोजन करना भी रहा चर्चा का विषय
विद्यालय निरीक्षण के दौरान कलेक्टर का विद्यार्थियों के बीच बैठकर उनके साथ भोजन करना भी इस दौरे का उल्लेखनीय हिस्सा रहा। प्रशासनिक अधिकारियों के स्कूल दौरे अक्सर निरीक्षण और समीक्षा तक सीमित रहते हैं, लेकिन बच्चों के साथ बैठकर भोजन करने से माहौल अधिक सहज और आत्मीय नजर आया।
कलेक्टर का बच्चों के साथ समय बिताना और उनके बीच बैठकर भोजन करना विद्यार्थियों के लिए सामान्य निरीक्षण से अलग अनुभव रहा। इस दौरान बच्चों को अधिकारी के साथ अनौपचारिक वातावरण में बातचीत का अवसर मिला। स्कूल के विद्यार्थियों के लिए ऐसा अनुभव लंबे समय तक याद रहने वाला हो सकता है।





